आर्यिका विजिज्ञासाश्री माताजी का पिच्छिका परिवर्तन संपन्न

माताजी ने प्रवचनों में संयम, सादगी और अहिंसा के महत्व को बताया और पिच्छिका प्राप्त करने वाले परिवारों को आशीर्वाद दिया। पिच्छिका से वास्तु दोष दूर होते हैं और आत्मशुद्धि एवं आध्यात्मिक विकास होता है।

पिच्छिका परिवर्तन में सद्भावना शाखा बालक हिल व्यू द्वारा फल समर्पण। बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य उपसर्ग विजेता समाधिस्थ गणाचार्य श्री विरागसागर जी मुनिराज की परम प्रभावक एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी यतिराज की परम आज्ञाकारी शिष्या प्रज्ञा प्रखरणी विजिज्ञासा श्री माताजी ससंघ का चातुर्मास मंगलधाम तिलक गंज में सुचारू है। 23 से 31 अक्टूबर 2025 तक 25 मंडलीय कल्पद्रुम महामंडल विधान विश्वशांति महायज्ञ एवं नगर रथ परिक्रमा के मध्य दिनांक 26 अक्टूबर को भव्य पिच्छिका परिवर्तन संपन्न हुआ जिसमें अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन महिला परिषद, त्रिशला संभाग, सद्भावना शाखा बालक हिल व्यू द्वारा वृहद श्रीफल सहित 10 फल थाल समर्पित किए गए। माताजी ने अपने प्रवचनों में बताया कि संयम, सादगी, अहिंसा हेतु चातुर्मास होते हैं साथ ही साधुओं के विहार, निहार, आहार, पडगाहन, वैया वृत्ति, औषधी दान करने वाले श्रावकों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए पिच्छिका प्राप्त करने वाले परिवारों को कहा की पिच्छिका से सारे वास्तु दोष दूर होते हैं।पिच्छिका प्राप्त करने वालों को दीक्षा की व साधुओं की सेवा की प्रेरणा मिलती है। यह आत्मशुद्धि एवं आध्यात्मिक विकास का यंत्र है।

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