विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में चल रहे दो दिवसीय ‘संविधान की गौरव गाथा का उत्सव का समापन

विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में चल रहे दो दिवसीय ‘संविधान की गौरव गाथा का उत्सव का समापन’
शिक्षा शास्त्र विभाग में संविधान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संविधान के इतिहास के विषय पर दो दिवसीय कार्यक्रम हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान का आयोजन किया गया । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से प्राप्त निर्देशों के परिपालन में संविधान अंगीकरण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के शिक्षा शास्त्र विभाग के तत्वाधान में 24 एवं 25 नवंबर को ‘हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान’कार्यक्रम का आयोजन किया गया । 24 नवंबर को निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।25 नवंबर को पोस्टर प्रदर्शनी और कार्यक्रम का समापन हुआ ।स्वागत भाषण कार्यक्रम की संयोजिका डॉ अनूपी समैया ने दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार जैन ने छात्रों में संवैधानिक मूल्यों की समझ विकसित करने की बात कही। मुख्य अतिथि प्रोफेसर अनुपमा शर्मा ने संविधान की गौरव गाथा के संबंध में जानकारी बच्चों को प्रदान की।कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉक्टर रानी दुबे ने बच्चों को इसी प्रकार से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया ।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किया गया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान स्नेहा साहू ,द्वितीय स्थान प्रेमलता कुमारी व हर्षित खरे, तृतीय स्थान शशांक नामदेव व रिया उमरे ने हासिल किया। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सलिला समर्पिता द्वितीय स्थान शिवम कुमार और सबा हसन, तृतीय स्थान प्रत्यूष रंजन पात्रा व आंचल चढ़ार ने प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजिका डॉ अनूपी समैया ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार माना। निर्णायक मंडल में डॉ योगेश पाल , श्रीमान योगेश सिंह रहे रहे, प्रदर्शनी का मूल्यांकन सम्माननीय मंच ने किया । कार्यक्रम में डॉ अखंड शर्मा ,डॉ रमाकांत ,डॉ अपर्णा श्रीवास्तव व छात्र मनीष, सोनल ,शशांक, गायत्री, रंगनाथ ,विपिन, राहुल तथा बड़ी संख्या में एम. एड . और बी.एड के छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे । कार्यक्रम आयोजन का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार एवं कर्तव्यों को जन -जन तक पहुंचाना, संविधान की मूल भावना को समझना व उसके संरक्षण का संदेश देना था।

Leave a Comment

Read More