
गुलामी के दौर में भी डॉ. अंबेडकर ने अपनी बात रखी -कुलपति प्रो. वाय.एस. ठाकुर
आधुनिक भारत की कल्पना, डॉ आंबेडकर के बिना अधूरी- प्रो. शांति देव
सागर । डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में डॉ भीम राव अम्बेडकर जी के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, डॉ. गौर एवं डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि डॉ अंबेडकर ने कोई रिजर्वेशन का लाभ नहीं लिया लेकिन उनकी इच्छा शक्ति देश के प्रति लगन ने उन्हें मजबूत बनाया । उन्होंने विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी वह भारत में आकर अन्याय के विरोध में लड़ाई लड़ी । उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में भी डॉ. अंबेडकर ने अपनी बात रखी उनकी तबीयत भी ठीक नहीं थी लेकिन फिर भी उन्होंने संघर्ष किया । सोशल रिफॉर्म के साथ-साथ डॉ. अंबेडकर के इकोनामिक थिओरी को आज भी याद किया जाता है । डॉ. अंबेडकर ने 5 लाख लोगों के साथ बुद्ध धर्म को स्वीकार किया लेकिन उनकी मेहनत और हिम्मत के कारण आज भी डॉ. अंबेडकर को हम याद करते हैं ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रो. शांति देव सिसोदिया ने कहा कि आधुनिक भारत की कल्पना डॉ. आंबेडकर के बिना अधूरी है । डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष की कहानी है चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उन्होंने सामाजिक न्याय और विकास की लड़ाई लड़ी । कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एसपी उपाध्याय ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के जीवन से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए । उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने विपरीत परिस्थिति में भी अपने और समाज की प्रगति के लिए काम किया उनका शोध और शिक्षा कठिन परिश्रम का परिणाम है । भारतीय संविधान के निर्माण में उन्होंने सबकी चिंता करते हुए विकास के मार्ग को बताया और लोकतंत्र को मजबूत किया । विश्वविद्यालय प्राक्टर प्रो. चंदा बेन ने डॉ. अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन समाज कल्याण को समर्पित था ।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर के पास 32 डिग्रियां थी और उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था । डॉ. अंबेडकर को आज दुनिया भर के लोग उनकी शिक्षा और कार्यों के लिए नमन किया जाता हैं । संयुक्त राष्ट्र ने भी पहली बार उनकी जयंती मनाई जिसमें 156 देश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । डॉ. अंबेडकर ने मानवता का संदेश दिया उनका संदेश आज भी प्रकाश देता है । उन्होंने शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय और विकास का मॉडल पूरी दुनिया के सामने रखा । कार्यक्रम में डॉ. अम्बेडकर चेयर द्वारा किये गए वर्ष भर में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रमों से संबन्धित पत्रिका का विमोचन मंचासीन अतिथिओं द्वारा किया गया । इस अवसर पर विश्विद्यालय के प्रो. अशोक अहिरवार, प्रो. अनिल कुमार, डॉ. शशि कुमार सिंह, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. रेखा सोलंकी डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. अवधेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे । कार्यक्रम में अजब सिंह,जितेंद्र, अभय, हिमांशु, बालचंद, नैनिका, जितेंद्र कबीरपंथी आदि का विशेष सहयोग रहा । कार्यक्रम का संचालन डॉ. देवेन्द्र कुमार एवं आभार प्रदर्शन डॉ. विरेन्द्र मत्त्सनिया ने किया ।











