
शिक्षक में सृजन और संहार दोनों का होता सामर्थ्य होता है शैलेंद्र जैन पंडित शंकर चतुर्वेदी की तेरहवें स्मरण पर्व का आयोजन चतुर्वेदी एवं तिवारी परिवार तथा श्यामलम संस्था के द्वाराआदर्श संगीत महाविद्यालय में किया गया । कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती, पं शंकर चतुर्वेदी श्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं डॉ सर हरि सिंह गौर के चित्र पर माल्यार्पण ,दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ श्री उमाकांत मिश्र अध्यक्ष आयोजक संस्था श्यामलाम ने सभी अथितियों का शाल श्रीफल एवम स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मान किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सागर विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा आज तीन पितृ पुरषों के स्मरण पर्व होने से यह आयोजन अद्भुत हो गया है । स्व. चतुर्वेदी को स्मरण करते हुए कहा कि पंडित शंकर दत्त चतुर्वेदी मेरे पिता के गुरु थे इस रिश्ते से वह मेरे भी गुरु हुए। उनकी प्रतिभा का यदि आपको दर्शन करना है तो आप उनके शिष्यों में उनकी प्रतिभा का दर्शन कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक होते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय के अनेक विद्यार्थियों को पीएचडी करने में मदद की। वह विश्वविद्यालय के कुल सांसद भी रहे। एक शिक्षक में सृजन और संहार दोनों का सामर्थ होता है। सृजनात्मक शक्ति के द्वारा वह अपने विद्यार्थियों को गढ़ता है तथा राष्ट्र विरोधी ताकतों का संहार करता है।
“नई सहस्त्राब्दी में साहित्य के शिक्षक की भूमिका” पर वक्तव्य देते हुए डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के सहा. प्राध्यापक डॉ.नौनिहाल गौतम ने कहा कि जहां शिक्षक नहीं होता है वहां पर ज्ञान रहस्य बन जाता है और जहां शिक्षक होता है वहां पर ज्ञान गीत बनकर सामने आता है।
ज्ञान को पेटेंट के बंधनों से मुक्त होना चाहिए जैसे श्रीमद् भागवत गीता विश्व में सभी के लिए उपलब्ध है उसके ज्ञान पर किसी प्रकार का कोई पेटेंट लागू नहीं होता।
विशिष्ट अतिथि डॉ आनंद तिवारी ने कहा इस शिक्षक की भूमिका समाज में सर्वोपरि है डॉ शंकर दत्त चतुर्वेदी गुरुकुल परंपरा के शिक्षक थे वह न केवल हिंदी अंग्रेजी संस्कृत व उर्दू के विद्वान थे साथ ही भूगोल के विषय का ज्ञान उनका अद्भुत था।
अध्यक्षता कर रहे पंडित शंकर दत्त चतुर्वेदी आदर्श शिक्षक सम्मान से सम्मानित शुकदेव तिवारी ने शंकर दत्त चतुर्वेदी के विषय में बताया कि आपने एक व्यक्ति में अनेक गुणों के चरित्र को चरितार्थ किया है। सामाजिक आध्यात्मिक व धार्मिक क्षेत्र में आपका समान अधिकार था। आपने कहा कि 20 वर्ष तक की आयु में शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान व्यक्ति के जीवन भर काम आता है।श्री तिवारी जी वाजपेयी जी की कविता का वाचन किया । कु निकिता दीक्षित ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया
कार्यक्रम के अंत में पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी के विषय में चर्चा की गई तथा डॉ हरि सिंह गौर जी की पुण्यतिथि पर 2 मिनट का मौन रखा गया।
लक्ष्मीनारायण चौरसिया, dr अंजना चतुर्वेदी तिवारी ने अथितियो स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की संचालन डॉ अमर जैन के किया आभार श्री आर के तिवारी ने ज्ञापित किया।कार्यक्रम में अंविका यादव हरिसिंग ठाकुर,डा आशीष दिवेदी,शिवरतन यादव,डा.लक्ष्मी पांडेय, डा. प्रतिभा खरे,डा. अंजना नेमा, श्रीमति मनीषा रिछारिया,संध्या सरबटे, सुप्रिया नवाथे,पूरन सिंग राजपूत, कुंदन पाराशर, कपिल वैसाखिया,हरि शुक्ला, रमाकांत मिश्र, संतोष पाठक, डा विनोद तिवारी,डॉ. प्रदीप पाण्डेय, रविंद्र दुबे कक्का, मुकेश तिवारी, रमेश दुबे, अमित तिवारी, डॉ. राम रतन पांडेय,ओ पी दुबे,अमित तिवारी, असीम दत दुवे, डा अरविंद बोहरे, मुकेश निराला,डॉ. अभय सिंह,उपस्थित रहे











