विश्वविद्यालय : सच्चे गुरु के बिना जीवन सार्थक नहीं हो सकता- प्रो. अनिल राय

विश्वविद्यालय : सच्चे गुरु के बिना जीवन सार्थक नहीं हो सकता- प्रो. अनिल राय
सागर | डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के हिंदी विभाग में हिंदी साहित्य परिषद द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अनिल कुमार राय ने “भक्ति साहित्य की प्रासंगिकता” विषय पर अपने विचार रखे। तथा स्वामी विवेकानंद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने भक्ति आन्दोलन पर चर्चा करते हुए स्त्री भक्त कवियों की चर्चा की। देश भर में भक्ति आन्दोलन के प्रसार पर विस्तृत विचार रखे। कबीर की युक्तियों को उल्लेखित करते हुए कहा कि”सत्य कहों तो मारन धावे”। समाज को जाती पातीं को तोड़ देना चाहिए, उन्होंने सरहपा के विवाह की चर्चा करते हुए कहा कि सरहपा ने एक सरकंडे बीनने वाली लड़की से विवाह किया। जम्भेश्वर नाथ जी के चिंतन पर भी अपनी बात रखी। एवं कहा कि खुश रहने के लिए भक्ति साहित्य पढ़िए। भक्ति साहित्य दैनिक दैनिंद्य का साहित्य है।
भक्त कबीर मध्यकालीन कवि है लेकिन उनका बोध आधुनिक है।
जीवन में सच्चा गुरु नहीं मिला तो आप सफल तो हो सकते हैं पर सार्थक नहीं हो सकते। जिंदगी में जो अतिरिक्त होता है वह सदैव दुःख का कारण होता है। विशिष्ट अतिथि प्रो आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने भारत का राष्ट्रबोध और युवा विषय पर अपनी बात रखी जिसमें उन्होंने कहा कि “आज देश बहुत बड़े संकट में है और इसे युवाओं की अतिआवश्यकता है, युवाओं का सामर्थ्य देश की तमाम समस्याओं को समाप्त कर सकता है, उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचार को श्रोताओं के मध्य साझा करते हुए कहा कि ” उठो जागो चलो और जब तक मत रुको जब तक लक्ष्य हासिल ना हो जाए।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता ही हिन्दी विभाग की अध्यक्ष और विश्वविद्यालय की कुलानुशासक प्रो. चंदा बैन द्वारा की गई। जिसमें उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि ” आज का यह व्याख्यान बहुत सार्थक हुआ है, हम सबको आज का व्याख्यान लाभ प्रदान करेगा। तथा स्वामी विवेकानंद जी को नमन किया।” विषय प्रवर्तन प्रो. राजेंद्र यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमांशु कबीर द्वारा किया गया। मुख्य वक्ताओं का परिचय डॉ. संजय नाइनवाड़ द्वारा पढ़ा गया। इसी दौरान प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी के शोधनिर्देशन में शोधार्थी सूर्यकांत त्रिपाठी की शोध मौखिकी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग एवं संस्कृत विभाग के शिक्षक डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अफ़रोज़ बेगम, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. नौनिहाल गौतम, डॉ. किरण आर्या, डॉ.रामहेत गौतम के साथ ही भिविन्न विभागों के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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