
नेपाल में डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान – शिक्षा और शोध सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया काठमांडू, नेपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी जिसका विषय भारत और नेपाल संबंध (राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एवं आर्थिक विकास) विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें ऑनलाइन एवं ऑफलाइन 16 देश के प्रोफेसर एवं शोध छात्र के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता आदि ने भाग लिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. श्रीराम प्रसाद उपाध्याय-विभागाध्यक्ष, सलाहकार नेपाल सरकार सामाजिक परिषद, त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल, मुख्य अतिथि भरत प्रसाद शाह-पूर्व वित्त मंत्री एवं ने.क.पा. का नेता मधेश प्रांत नेपाल, विशेष अतिथि डिल्लीराम शर्मा, विभागाध्यक्ष हिन्दी, त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल, मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा रहे। उक्त संगोष्ठी में डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा ने भारत और नेपाल के बीच सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि भारत और नेपाल का संबंध रोटी और बेटी का है, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक है, भारतीय साहित्य में विश्व के इतिहास में रामायण, महाभारत और शिव पुराण उक्त संदर्भ मिलते हैं। नेपाल भारत का दिल है, नेपाल और भारत की अर्थव्यवस्था एक दूसरे पर निर्भर है, पर्यटन से कैसे किसी देश के अर्थव्यवस्था और रोजगार मजबूत हो सकता है यह हमको जाकर नेपाल में देखना होगा। हिंदी और हिंदुत्व के प्रति नेपाल का प्रेम पूरे भारत के लिए प्रेरणा का केंद्र है। नेपाल में कृषि तेजी से मजबूत होता है, इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले समय में नेपाल की प्रति व्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय को मजबूत करेगा, नेपाल में शिक्षा, रोजगार और इसके लिए होने वाले पलायन को रोकना होगा, पहाड़ी क्षेत्र में मनरेगा जैसी योजनाओं के माध्यम से नेपाल के ग्राम पंचायतों का विकास के साथ-साथ ग्रामीणों को काम मिल सकें ,जिससे वह पलायन न करें, इस और भी नेपाल को देखने की आवश्यकता है, भारत की मध्य प्रदेश सरकार और नेपाल की सरकार को उज्जैन महाकालेश्वर से काठमांडू तक बस चलाने की आवश्यकता है जिससे दोनों देश के बीच धार्मिक संबंध और मजबूत हो सके, भारत के आई.आई.टी., आईआई.एम. एवं एम्स जैसी संस्था दोनों देशों के विशेष सहयोग से नेपाल में स्थापित करने की आवश्यकता है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें। भगवान पशुपतिनाथ की शक्ति, उनका आशीर्वाद भारत और नेपाल के संबंधों को और मजबूत करता है और यह ऐसे संबंध है जो हमेशा मजबूत होकर दोनों देशों के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास में बहुत बड़ा योगदान देगा। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. चिरंजीवी आचार्य-एसोसिएट प्रोफेसर केन्द्रीय समाजशास्त्र विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल, जय प्रकाश महतो-अध्यक्ष, भाषा संस्कृति प्रतिष्ठान, नेपाल, संगोष्ठी संयोजक डॉ. बीर बहादुर महतो-भाषा एवं संस्कृति विशेषज्ञ, गोरखापत्र संस्थान काठमांडू, नेपाल एवं संगोष्ठी सचिव बिनोद कुमार विश्वकर्मा-केन्द्रीय हिन्दी विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू, नेपाल, डॉ. प्रवीण कुमार झा, मनोज गोप यादव, डॉ. राजीव झा, आर. एस. महतो, प्रीति रमन, शोभा कुमारी महतो आदि की उपस्थिति रही।











