
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कार्यान्वयन के पांच वर्ष:- उपलब्धियां और चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर मध्य प्रदेश एवं भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत जिला सागर के तत्वाधान में विश्व विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कार्यान्वयन के पांच वर्ष उपलब्धियां और चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
सर्वप्रथम मां सरस्वती जी और भारत माता की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ कार्यशाला का उद्घाटन हुआ।
सारस्वत वक्ता प्रोफेसर अर्चना पांडेय* ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित है जिसमें आत्म- बोध एवं आत्मावलोकन, भारतीय मातृभाषाओं में शिक्षा और भारत का देशज ज्ञान जो कि पूर्णतः प्राकृतिक और वैज्ञानिक है, के सिद्धांत को बल देता है जिससे कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास हो सके उनमें मूल्यों का विकास और संस्कार विकसित हो सके।
*कार्यशाला के संयोजक एवं विश्वविद्यालय के अकादमिक मामलों के निदेशक प्रो. दिवाकर राजपूत ने कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान दृष्टि, महिला उत्थान, भारतीय दर्शन के कौशल विकास, व्यावहारिक स्वरूप पर परिचर्चा हुई, और विश्व विद्यालय के विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम में परिवर्तन, सैद्धांतिक अभ्यास और व्यक्तित्व विकास की संकल्पना को आकार दिया गया, जिसमें राष्ट्र निर्माण की संकल्पना प्राथमिक रखी गई।
*मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक जी* ने बताया कि हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान और शिक्षा दोनों ही सम्मिलित है, वहीं कौशल विकास आम जीवन से जुड़ी कार्यों की क्षमता और रोजगारमुखी, संस्कार युक्त शिक्षा है , इस कार्यशील राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के 5 साल में डिजिटल शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, बुनियादी साक्षरता में सुधार और उच्च शिक्षा में नामांकन वृद्धि जैसी कई उपलब्धियां मिली हैं, लेकिन दूसरी ओर कुछ चुनौतियां भी निकल कर आई जिसमें,शिक्षकों की कमी, डिजिटल डिवाइड, मातृभाषा में शिक्षा लागू करने में चुनौतियां और ड्रॉपआउट दर जैसी समस्याएं भी हैं, इन्हें दूरी करने के निरंतर प्रयास किय जा रहे हैं।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रोफेसर यशवंत सिंह ठाकुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि बुनियादी शिक्षा में सुधार के लिए किय गए अध्ययन बताते हैं कि प्राथमिक शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद पढ़ने की क्षमता में सुधार हुआ है, और 15-16 आयु वर्ग के गैर-नामांकित बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।
वहीं डिजिटल शिक्षा का विस्तार भी हुआ है,स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ी है, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा मिला है।
पी एम श्री योजना में 14,500 से अधिक स्कूलों का उन्नयन किया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल बना है।
उच्च शिक्षा में वृद्धि देखी गई है, जिसमें उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि हुई है, और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट जैसी पहलें छात्रों को लचीलापन दे रही हैं वहीं व्यावसायिक शिक्षा में सामान्य शिक्षा को जोड़ा गया है और इसी शिक्षा नीति के तहत कौशल केंद्र स्थापित किए गए हैं।
साथ ही कुछ चुनौतियां जैसे कि
सीखने के अंतराल प्राथमिक स्तर पर अभी भी कई छात्र अपेक्षित पढ़ने की क्षमता हासिल नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता में बड़ा अंतर है।
मातृभाषा में शिक्षा: निजी स्कूलों और शहरी क्षेत्रों में अंग्रेजी माध्यम की प्राथमिकता के कारण मातृभाषा में शिक्षा लागू करना कठिन हो रहा है, जिससे सामाजिक विषमता का खतरा है।शिक्षक प्रशिक्षण: योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, खासकर द्विभाषी और स्थानीय भाषाओं के शिक्षकों की, एक बड़ी चुनौती है। जिसे समाधानित कम करना आवश्यक है।
नीति कार्यान्वयन: नीति के सभी पहलुओं, जैसे कि पाठ्यक्रम सुधार और समावेशी शिक्षा, को प्रभावी ढंग से लागू करने में समय और संसाधन लगेंगे।
संक्षेप में, NEP 2020 ने शिक्षा में कई सकारात्मक बदलाव लाए हैं, लेकिन इसके पूर्ण कार्यान्वयन के लिए इन चुनौतियों का समाधान करना महत्वपूर्ण है, ताकि भारत को वास्तव में एक ज्ञान महाशक्ति बनाया जा सके।
*आभार प्रोफेसर ज्ञानेंद्र त्रिपाठी जी ने व्यक्त किया, मंच संचालन विश्वविद्यालय के *संयुक्त कुलसचिव एवं राजभाषा अधिकारी श्री संतोष सोहगौरा* ने किया। कार्यशाला का विषय प्रवर्तन डॉ. क्लीं राय ने किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांच वर्ष पूर्ण होने के पश्चात उपलब्धियों और चुनौतियों को तार्किक दृष्टि से मूल्यांकित करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 50 से अधिक शिक्षाविदों द्वारा पंजीकरण करवाया और सहभागिता कर रहे हैं।











