सारी दुनिया एक रंगमंच है और हम सभी एक पात्र: डाॅ. तिवारी

सारी दुनिया एक रंगमंच है और हम सभी एक पात्र: डाॅ. तिवारी
सारी दुनिया एक रंगमंच है और हम सभी एक पात्र इस विचार को जोर देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. तिवारी ने कार्यशाला का शुभारम्भ किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रसन्नचित और आत्म सन्तुष्टि के लिए उदाहरण देते हुए इसके महत्व को बताया। छः दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला दिनांक 19 से 24 जनवरी 2026 का उद्घाटन सत्र अंग्रेजी विभाग में आयोजित किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में डाॅ. प्रकाश सिंह ठाकुर निर्देशक, उस्ताद अलाउदीन अकादमी भोपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डाॅ. संतोष साहू ने विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्यशाला में अपना योगदान दिया।
कार्यशाला का उद्घाटन मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यशाला की सह संयोजक डाॅ. अलका, पुष्पा, निशा ने कार्यशाला का संचालन किया। कार्यशाला की संयोजक डाॅ. निशा इन्द्रगुरू ने कार्यशाला के उद्दश्यों के बारे में बताया और सचिव श्रीमती क्रांति लोधी ने सभी अतिथियों का अभार व्यक्त किया। इसके साथ ही डाॅ. गुरू ने रंगमंच के महत्व को बताते हुये कहा कि जो व्यक्ति रंगमंच के कौशल सीख लेता है, वह जिदंगी के हर प्रकार के साक्षात्कार के लिए तैयार हो जाता है। विद्यार्थी के सम्पूर्ण और चंहुमुखी विकास में रंगमंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्य अतिथि प्रकाश सिंह ठाकुर ने विद्यार्थी को रंगमंच प्रदान करने के लिए सी.सी.आर.टी से इस प्रकार की विधा के लिए छात्रवृत्ति दिये जाने के बारे में जानकारी दी और बड़े स्तर की कार्यशाला का आयोजन किये जाने का प्रस्ताव रखा। मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. संतोष साहू ने रंगमंच के उद्भव और इतिहास के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस कार्यशाला में रंगमंच के मूलभूत तत्वों के बारे में बताया जायेगा। इस कार्यशाला में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. रश्मि दुबे, डाॅ. बिन्दु श्रीवास्तव तथा सहायक प्राध्याक डाॅ. अपर्णा चाचोंदिया, डाॅ. हरिओम सोनी उपस्थि रहें। सहयोगी के रूप में शोधार्थी हेमा सेंगर उपस्थित रहीं।
प्राचार्य डाॅ. आनंद तिवारी

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