2026-27 का बजट ग्रामीण भारत में कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में गरीबी मिटाने, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित हो

2026-27 का बजट ग्रामीण भारत में कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में गरीबी मिटाने, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित हो

डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा, अर्थशास्त्री
एम.ए. अर्थशास्त्र, एम.ए. ग्रामीण विकास, एम.बी.ए. वित्त, पी.एच.डी. एवं डी.लिट् अर्थशास्त्र
राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवा आर्थिक परिषद एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भारतीय आर्थिक परिषद और मध्यप्रदेश प्रभारी
सचिव, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ आर्थिक परिषद बजट 2026-27 में ग्रामीण कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने का उचित प्रयास करना होगा, क्योंकि इनमें देश के आर्थिक परिदृश्य में समग्र रूप से सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। इसका मकसद विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण, रोजगार, आवास एवं कनेक्टिविटी, डेयरी एवं मत्स्य पालन, कौशल विकास के क्षेत्र में सरकारी नीतियों को लोगों के अनुकूल बनाना था और सरकार की मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के साथ इसके दायरे को बढ़ाकर एमएसएमई को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार के प्रयासों से, कृषि और ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत के दो मजबूत स्तंभ बनाने की ओर अग्रसर हैं। बजट 2026-27 देश के विकास को गति देने वाला हो। यह बजट ग्रामीण भारत में कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में गरीबी मिटाने, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, सरकार कर संग्रह और व्यय में इजाफा करके खपत को बढ़ाना होगा। भारत के संदर्भ में यह जरूरी भी है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था उपभोग आधारित है। जब खपत में वृद्धि होगी तो अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। केसीसी की ऋण सीमा में वृद्धि, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत, उन्नत बीज का इस्तेमाल, कपास, दाल, मतस्य आदि के उत्पादन को बढ़ाने वाले उपायों, लॉजिस्टिक्स की समस्या को दूर करने, वंचित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, बुनियादी ढांचा, स्टार्टअप्स, एमएसएमई आदि को मजबूत करने से ग्रामीणों की आय बढ़ेगी, जिससे बचत, निवेश, खपत एवं आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था उपभोग आधारित है। जब खपत में वृद्धि होगी तो अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात को भारत की विकास यात्रा के चार शक्तिशाली इंजन ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए छह साल के लिए दाल आत्मनिर्भरता कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक राष्ट्रीय मिशन सिकुड़ती कृषि भूमि और अनियमित मौसम जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च उपज देने वाली बीज किस्मों का विकास हेतु बजट में विशेष प्रावधान करने होंगे। बजट 2026-27 में ग्रामीण आर्थिक विकास पर अटूट विश्वास जाहिर किया गया है। वैश्विक नीतियों में बदलाव, जैसे टैरिफ, संरक्षणवाद, नीतिगत ब्याज दरों के संदर्भ में अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक के रुख आदि के कारण देसी एवं वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले उपाय किसान, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए बजट में किसानों के लिए 2,66,817 लाख करोड़ रुपये का पूर्व बजट में प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के बजट में प्रावधान की गई राशि से 1000 करोड़ रुपये अधिक है। कृषि क्षेत्र के संशोधित व्यय को 1,40,859 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,71,437 करोड़ रुपये किया गया था। पिछले 2024-25 साल के बजट में 1.64 लाख करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी के लिए दिए गए थे, जिसे बढ़ाकर 2025-26 साल के बजट में 1.67 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, कृषि विकास योजना के लिए 8,500 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जबकि 2025-26 साल के बजट में इस मद में 7,553 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। पशुपालन और डेयरी के मद में 1,050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि 2025-26 साल के बजट में इस मद में 369 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। उक्त मद में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि करना बजट 2026-27 में उचित होगा। बजट 2025-26 में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत 100 वैसे जिलों पर ध्यान दिया जाएगा, जहाँ फसलों की कम उपज होती है। इन जिलों में वित्तीय मदद, भंडारण, उन्नत बीज, सिंचाई आदि की व्यवस्था सरकार करेगी। इस योजना का मकसद किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। एक अनुमान के अनुसार इस योजना को अमलीजामा पहनाने से 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होने थे। राज्यों की भागीदारी के साथ शुरू होने वाली धन-धान्य योजना कम उत्पादक, मध्यम फसल घनत्व और औसत से कम ऋण मानक वाले जिलों को सहारा देने के साथ-साथ वहां खेती को बढ़ावा देने का भी काम करेगी। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत किसानों को कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध होंगे। किसानों को पैदावार बढ़ाने के लिए मुफ्त उर्वरक दिए जाएंगे। छोटे व सीमांत किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद में सब्सिडी भी दी जानी चाहिए। कृषि आधारित उद्योग, कृषि बाजार, ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा को मजबूत करना। ग्रामीण क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण पलायन को रोकना बजट 2026-27 के केन्द्र में होना चाहिए। युवा शिक्षा और रोजगार के लिए पलायन न करें एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिलें, कृषक को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलें। इस बात की चिंता सरकार को केन्द्रीय बजट 2026-27 में करनी होगी।

डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा, अर्थशास्त्री
एम.ए. अर्थशास्त्र, एम.ए. ग्रामीण विकास, एम.बी.ए. वित्त, पी.एच.डी. एवं डी.लिट् अर्थशास्त्र
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सचिव, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ आर्थिक परिषद

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