धर्म के लिए जियें समाज के लिए जियें के ओजपूर्ण गीत से गूंजा सूर्यविजय अखाड़ा परिसर

धर्म के लिए जियें समाज के लिए जियें के ओजपूर्ण गीत से गूंजा सूर्यविजय अखाड़ा परिसर

विशाल हिन्दू सम्मेलन में ओजस्वी वक्तव्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच बड़ी संख्या में सर्व समाज के श्रद्धालुओं ने शामिल होकर एकता का परिचय दिया

सागर दिनांक 1 फ़रवरी 2026

हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्। मम दीक्षा हिन्दू: रक्षा, मम् मंत्र: समानता” को आत्मसात करते हुए अतिथियों के ओजपूर्ण वक्तव्य, प्रेरणादायी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गौ पूजन, भारत माता पूजन के साथ पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ विवेकानंद बस्ती का विशाल हिन्दू सम्मेलन सूर्य विजय अखाड़ा परिसर में सम्पन्न हुआ। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कन्या पूजन एवं गौ पूजन कर हिन्दू रीती रीवाज के साथ सम्मेलन का आगाज किया गया। धर्म के लिए जियें समाज के लिए जियें गीत के ओजपूर्ण बोलों से सारा परिसर गूंज गया, लोक संगीत तमूरा भजन की प्रस्तुति से सभी को बुंदेलखंड की संस्कृति से जोड़ा गया। सभी ने भारत माता की आरती करने के पश्चात समरसता खिचड़ी की प्रसादी पाई।

मुख्य बौद्धिककर्ता श्री अंशुल भार्गव ने अपने उद्बोधन में कहा की हिन्दु मतलब सब को धारण करने वाला हम हिन्दु वो हैं जो सब की मंगल कामना करते हैं। हिन्दु धर्म प्रेम करुणा के साथ जीवन जीना सिखाता है। हिन्दु कोई मत पंत नहीं है। विशेष मान्यताओं के साथ जो युक्त हैं वो हिन्दु हैं पराये धन को हम मिट्टी और धरती माता को हम जननी मानते हैं। श्रीराम ने सोने की लंका छोड़कर अपनी मातृभूमि को महत्व दिया ये हिंदुत्व है वे 14 वर्ष वनवास में अपनी मातृ भूमि की मिट्टी साथ रख कर पूजन करते थे। डॉ हेडगेवार जी ने कुछ स्वयं सेवकों के साथ आरएसएस की भूमिका गढ़ी तो उन्होंने देखा की हमारे लोग आत्मकेंद्रित हैं उन्हें राष्ट्र केंद्रित बनाने की आवश्यकता है और उन्होंने आगे की रुपरेखा बनाते हुए संघ रचना की जो आज आप देखते हैं। संतो और विद्वत पुजारी जन से हमें कथाओं प्रवचन के माध्यम से मार्गदर्शन मिलता है यह हमारा सौभाग्य है। हम हिन्दु प्रकृति को आदर देते हैं। सभी को ये स्वभाव उत्पन्न करना होगा की सनातन के लिए हिन्दु समाज में न कोई बड़ा न कोई छोटा हम सब एक हैं। यह संदेश तो हमारे आराध्य भगवान राम ने भी दिया उनके प्रिय जनों में राजा भील, सबरी जैसे नाम प्रमुख हैं। भारत की सयुक्त परिवार संस्कृति को समाप्त करने के लिए बहुत सी शक्तियां सक्रीय हैं हम सभी को उन्हें विफल करना है। हमें परिवार के बीच प्रेम को बढ़ाना है। हम अगली पीढ़ी तक संस्कार को पहुंचाएँ। मोबाईल से दूर होकर परिवार के साथ थोड़ा तो समय बिताएँ। इन विषयों पर हम सभी को चिंतन करने की आवश्यकता है।

पंडित श्री यशोवर्धन चौबे ने प्रेरक उद्बोधन देते हुए कहा की समरसता समाज के लिए वह कार्य है जो आने वाली कई पीढ़ियों को पोषित करने वाला है। उन्होंने समरसता का अर्थ समझाते हुए कहा की हम सभी एक ऐसे देश के वासी हैं जहाँ भिन्नता में एकता का वाक्य स्वयं सिद्ध होता है। उन्होंने खिचड़ी का उदाहरण समरसता के लिए दिया। उन्होंने सनातन में बताई गईं पूजन पद्धितियों को सही से अपनाने हेतु सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा की आज पूर्णिमा के महत्वपूर्ण दिन यह आयोजन हुआ हम सब सौभाग्यशाली हैं।

सुश्री मनोरमा गौर जी ने पंच परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए अपना प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा की सारे भारत में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन स्वदेशी अपनाने, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के साथ हिन्दू जागरण हेतु किया जा रहा है। समाज को एकत्र और जाग्रत बनाने के लिए यह आयोजन महत्वपूर्ण है। प्रकृति हमारा मूल है हमें प्रकृति का संरक्षण करना सनातन संस्कृति ने सिखाया है हम घरों में तुलसी का पूजन करते हैं वृक्ष, नदी, पहाड़, मिट्टी की पूजा करते हैं इन सभी संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में माँ का बड़ा योगदान है। मातृ शक्ति के समर्पण से ही आदर्श परिवार बनता है। आदर्श नागरिकों से राष्ट्र का निर्माण होता है। यहां उपस्थित सभी माताओं बहिनों को जागरूक होकर सनातन संस्कृति को सशक्त बनाना है।

हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सनातन धर्म एवं सामाजिक एकता को बढ़ावा देने हेतु बच्चों ने सक्रीय सहभागिता करते हुए भारतीय महान व्यक्तित्वों पर आधारित वेशभूषा एवं वक्तव्य प्रतियोगिता में आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। प्रथम द्वितीय तृतीय विजेता को शील्ड प्रमाण पत्र से पुरस्कृत किया गया सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार वितरित कर प्रोत्साहित किया गया।

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