भारत का बाजार अमेरिका के महत्वपूर्ण है, टैरिफ 18 प्रतिशत अमेरिका की मजबूरी – डॉ देवेंद्र विश्वकर्मा

भारत का बाजार अमेरिका के महत्वपूर्ण है, टैरिफ 18 प्रतिशत अमेरिका की मजबूरी – डॉ देवेंद्र विश्वकर्मा

भारत का बाजार बड़ा है, भारत की युवा आबादी है, विश्व का बड़ा देश भारत है, बड़ी आबादी भारत में है इसलिए अमेरिका के राष्ट्रपति को पता है अगर भारत के बाजार से अमेरिका बाहर हो जाता है, चीनी या अन्य देश या यूरोप इस देश में आ जाता है और वह ट्रेड डील कर लेता है, तो उसके लिए बड़ा नुकसान होगा, उसके उद्योगपति, उसके उद्योग और उसके जो प्रोडक्ट्स हैं को मार्केट नहीं मिलेगा। भारत और अमेरिका के ट्रेड की अगर हम बात आज करते हैं तो भारत का अमेरिका को निर्यात 86.5 अरब डॉलर का है, यूएई का निर्यात 36.6 अरब डॉलर है, नीदरलैंड का निर्यात 22.8 अरब डॉलर का है, ब्रिटेन का 14.5 अरब डॉलर का है, जबकि चीन से व्यापार घाटा14.3 अरब डॉलर का है, इसका अर्थ स्पष्ट है कि अमेरिका से भारत को फायदा है, अमेरिका टैरिफ के कारण भारत को तो नुकसान हुआ ही है लेकिन अमेरिका उपभोक्ताओं को सालाना औसत 2400 डॉलर करीब ₹200000 का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा था, इससे 2.4 प्रतिशत खुदरा महंगाई अमेरिका में बढ़ रही थी अगर यह लंबे समय तक रहती तो 1.2 प्रतिशत और बढ़ सकती थी, अमेरिका हर साल करीब 3.26 ट्रिलियन डॉलर अर्थात 272 लाख करोड रुपए का माल दूसरे देशों से आयात करता है।

अमेरिका जानता है कि भारत से ज्यादा दिन आर्थिक दुश्मनी ठीक नहीं है इससे भारत को तो आर्थिक नुकसान हो ही रहा है लेकिन उससे ज्यादा अमेरिका को आर्थिक नुकसान और समस्या होगा। वह भारत के बाजार में नहीं आ पाएंगे, उससे अमेरिका को भी घाटा होने वाला है इसलिए मैंने पहले ही अपने कई वक्तव्य में कहा था कि अमेरिका भारत से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकता क्योंकि भारत का बाजार अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है इसलिए जो ट्रंप ने 18 प्रतिशत टैरिफ किया है इसका मैं स्वागत करता हूं और उसे आने वाले भविष्य में और कम करेंगे, क्योंकि भारत का बाजार अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा महत्वपूर्ण है
भारत अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर और चीन से हमारा व्यापार घाटा 14.3 अरब डॉलर का है, 2024 -25 में हमने अमेरिका को 86.51 अमेरिका डॉलर का सामान बेचा जबकि अमेरिका ने हमको 45.69 अमेरिका डॉलर का सामान बेचा 2025 में भारत को निर्यात में 48.02 बिलियन डॉलर यानी 4 लाख करोड रुपए का फायदा भारत को हुआ है, हमारा व्यापार अमेरिका से सरप्लस 40.42 बिलियन डॉलर का, हमने अमेरिका को औषधि और जैविक उत्पादन 8.1 अरब डॉलर, दूर संचार उपकरण 6.5 अरब डॉलर, कीमती पत्थर 5.3 अरब डॉलर पेट्रोलियम उत्पादन 4.1 अरब डॉलर ,इलेक्ट्रॉनिक रत्न आभूषण आदि निर्यात किए हैं, 2024 -25 में अमेरिका और भारत का व्यापार 132.2 बिलियन पर था जो 2030 तक 500 अरब डालर तक पहुंचाने की उम्मीद है, अमेरिका को पता है कि एशिया में अगर कोई भरोसेमंद दोस्त अमेरिका के लिए है तो वह केवल भारत है, अमेरिका भारत के माध्यम से चीन और रूस पर दबाव भी देना चाहता है, इसलिए अमेरिका की मजबूरी थी कि वह भारत के साथ खड़ा रहे अगर वह भारत के साथ खड़ा नहीं रहता तो एशिया में कमजोर आर्थिक और राजनीतिक रूप से हो रहा था, भारत का बाजार अमेरिका के लिए मजबूरी है इसलिए उसने 8% टैरिफ कम किया भविष्य में इसको और काम करेगा

डॉ. देवेंद्र विश्वकर्मा, आर्थिक विशेषज्ञ
एम.ए. अर्थशास्त्र, एम.ए. ग्रामीण विकास, एम.बी.ए. वित्त, पी.एच.डी. एवं डी.लिट् अर्थशास्त्र
राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवा आर्थिक परिषद,
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, इंडियन इकोनामिक एसोसिएशन एवं मध्य प्रदेश प्रभारी

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