आर्टस एण्ड कॉमर्स कॉलेज में जिला स्तरीय लेखा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न

आर्टस एण्ड कॉमर्स कॉलेज में जिला स्तरीय लेखा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन सम्पन्न
सजगता ही लेखा प्रबंधन का उपाय है : अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे

शासकीय खातों का लेखा-जोखा नियमानुसार होना चाहिए : प्रो. डॉ. राधावल्लभ शर्मा

लेखा प्रबंधन में त्रुटिहीन कार्यप्रणाली ही संस्था की रीढ़ – संयुक्त संचालक हेमलता पटेल

सागर / शासकीय संस्थानों में वित्तीय अनुशासन, ऑडिट की तैयारी और भंडार क्रय नियमों की सूक्ष्म जानकारी देने के उद्देश्य से पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में ‘जिला स्तरीय लेखा प्रबंधन’ कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के महाविद्यालय से आए प्राचार्य एवं वित्तीय प्रभारियों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्यों पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय प्रशासन अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ प्रशासनिक शुचिता के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं संभाग के महाविद्यालयों के बीच समन्वय और कार्यकुशलता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगी।
विषय प्रवर्तक प्रोफेसर डॉ. राधावल्लभ शर्मा ने कार्यशाला में पी.एम. उषा (PM-USHA) योजना के तहत प्राप्त ग्रांट के सदुपयोग और उसके उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) समय पर जमा करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अधोसंरचना विकास और गुणवत्ता सुधार के लिए आवंटित राशि का लेखा-जोखा नियमानुसार रखा जाना अनिवार्य है।
पीएम उषा प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी ने पीएम उषा योजना के अन्तर्गत हुए कार्यों की रूपरेखा विस्त़ृत रूप से रखी।
सारस्वत वक्ता डॉ. जी.एल. पुन्ताम्बेकर ने अपने दीर्घकालिक अनुभव साझा करते हुए सेवा पुस्तिका संधारण और पेंशन प्रकरणों के त्वरित निराकरण के गुर सिखाए। कार्यशाला के दौरान एक ‘शंका समाधान सत्र’ भी आयोजित किया गया, जिसमें जिले भर से आए प्राध्यापकों और लेखा सहायकों ने अपनी तकनीकी समस्याओं का विशेषज्ञों से सीधा समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जयकुमार सोनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पूंजीगत और राजस्व व्यय के बीच के अंतर को समझना और बजट आवंटन के अनुसार व्यय की योजना बनाना ही इस कार्यशाला की मूल सफलता है। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए टिप्स महाविद्यालयों के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होंगे।
कार्यशाला का संचालन आयोजन सचिव डॉ. अमर कुमार जैन तथा अतिथियों का स्वागत डॉ संदीप सबलोक ने किया।
प्रथम विचार सत्र की मुख्य अतिथि के रूप में ज्वाइंट डायरेक्टर कोष एवं लेखा श्रीमती हेमलता पटेल ने अपने सारगर्भित संबोधन में कहा कि लेखा प्रबंधन में छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी ऑडिट आपत्तियों का कारण बनती है। उन्होंने कैश बुक संधारण, वाउचर वेरिफिकेशन और जीएफआर (General Financial Rules) 2017 के नवीनतम संशोधनों का उल्लेख करते हुए बताया कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के युग में ई-प्रोक्योरमेंट और जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी न केवल पारदर्शी है बल्कि प्रक्रिया को सरल भी बनाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आहरण संवितरण अधिकारी (DDO) को भुगतान से पूर्व देयकों की शुद्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी दक्षता ही आज की आवश्यकता है, ताकि बजट का समर्पण न हो और विकास कार्य समय सीमा में पूरे हों।
इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. के.एल. वर्मा ने की आपने बुन्देली शब्दों की छटा के बीच मैंनेजमेंट लेखा प्रबंधन के गुर सिखाये।
रानी अवन्ती बाई वि.वि. सागर की वित्त नियंत्रक श्रीमती सुभाषिनी जैन ने शैक्षणिक और प्रशासनिक पारदर्शित की बात की, सी.ए. नमन बडौनिया ने इंकमटेक्स, जीएसटी, टीडीएस पर विचार व्यक्त. किये। पेंशन अधिकारी अभय शर्मा ने पेंशन प्रकरण निराकरण पर चर्चा की। प्रथम विचार सत्र का संचालन डॉ. देवेन्द्र सिंह ठाकुर ने किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीरज दुबे ने जिले के समस्त प्राचार्यों, लेखापाल, कम्यूटर ऑपरेटर को लेखा प्रबंधन में सजगता, जागरूकता की बात की। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. भावना यादव ने भी विचार व्यक्त किये। डॉ. आर.डी. बडौनिया ने टेली में लेखांकन पर पीपीटी के माध्यम से जिला स्तरीय कार्यशाला में लेखा प्रबंधन की बारीकियों को विस्तार से समझाया। समापन सत्र के कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संगीता कुंभारे ने किया। आभार प्रदर्शन संयोजक डॉ. जयकुमार सोनी द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक ,अतिथि विद्वान, विद्यार्थी सहित जिले के समस्त शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, लेखापाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर व प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में वाणिज्य विभाग के डॉ. मनीष जैन, डॉ. शालिनी परिहार एवं डॉ. अनिल मेहरोलिया का विशेष योगदान रहा।लेखा प्रबंधन कार्यशाला के अवसर पर समस्त महाविद्यालयीन स्टॉफ, कार्यालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे।

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