
राष्ट्रभक्ति का शंखनाद: अब राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा 3 मिनट का ‘वंदे मातरम’
(विधायक प्रदीप लारिया के संकल्प और प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक निर्णय से संवरी राष्ट्र की अस्मिता; सनातन सद्भाव संगठन ने जताया आभार)
सागर/12.02.2023 : भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। सदियों से करोड़ों भारतीयों की अंतरात्मा में स्पंदित होने वाला ‘वंदे मातरम’ अब अपनी पूर्ण गरिमा के साथ राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा। सनातन सद्भाव संगठन (संपूर्ण भारत) के अटूट विश्वास, नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया के प्रखर नेतृत्व और यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसंवेदनाओं के प्रति संवेदनशीलता ने इस महान राष्ट्रवादी लक्ष्य को धरातल पर उतार दिया है।
वैचारिक आधार: नागरिकों के मूल कर्तव्य और ‘वंदे मातरम’
इस जन-आंदोलन की नींव 15 जनवरी 2026 को रखी गई, जब सनातन सद्भाव संगठन के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया से भेंट की। संगठन का मर्म स्पष्ट था—भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए (मूल कर्तव्य) के तहत ‘वंदे मातरम’ को वह स्थान मिले, जिसका वह हकदार है। विधायक लारिया ने विषय की गंभीरता और इसके राष्ट्रीय महत्व को भांपते हुए इसे केवल एक मांग नहीं, बल्कि राष्ट्र का स्वाभिमान माना।
संकल्प से सिद्धि: विधायक लारिया का पत्र और जन-सैलाब
राष्ट्रवादी विचारधारा के संवाहक विधायक प्रदीप लारिया ने 21 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस जनभावना से अवगत कराया। उन्होंने पुरजोर मांग की कि वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत की श्रेणी का सर्वोच्च सम्मान मिले।
इस मांग को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए, विधायक लारिया के आह्वान पर 24 जनवरी 2026 को नरयावली विधानसभा में ‘प्रथम वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत सम्मान रैली’ का आयोजन हुआ। यह रैली केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक गर्जना थी। हजारों नागरिकों का उल्लास और उनकी सहभागिता इस बात का प्रमाण थी कि भारत का जनमानस अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए आतुर है।
मोदी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय: गृह मंत्रालय की गाइडलाइन
जनभावनाओं के पारखी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुनीत मांग को स्वीकार करने में क्षण भर की भी देरी नहीं की। 28 जनवरी 2026 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने ऐतिहासिक गाइडलाइन जारी कर दी। आदेशानुसार, अब देश के समस्त औपचारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पूर्व 3 मिनट का वंदे मातरम अनिवार्य रूप से होगा। यह निर्णय भारत की उस गौरवशाली परंपरा का सम्मान है, जिसने स्वाधीनता संग्राम में प्राण फूँके थे।
अभिनंदन: कृतज्ञता और राष्ट्रीय गौरव का मिलन
जैसे ही यह ऐतिहासिक आदेश धरातल पर उतरा, संपूर्ण राष्ट्र में हर्ष की लहर दौड़ गई। सनातन सद्भाव संगठन के पदाधिकारियों ने विधायक श्री लारिया के रजाखेड़ी स्थित कार्यालय पहुँचकर उनका भव्य अभिनंदन किया। संगठन ने इसे विधायक लारिया की दूरदर्शिता और प्रधानमंत्री मोदी की अडिग इच्छाशक्ति की जीत बताया।
“वंदे मातरम केवल शब्द नहीं, यह माँ भारती की अर्चना है। प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय विकसित भारत की सांस्कृतिक नींव को और सुदृढ़ करेगा।” > — सनातन सद्भाव संगठन
पुलकित है भारत की अंतरात्मा
यह केवल एक नियम परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की अंतरात्मा का पुनर्जागरण है। राष्ट्रगान की मर्यादा और राष्ट्रगीत का सम्मोहन अब एक साथ मिलकर भारत के आकाश को गुंजायमान करेंगे। विधायक प्रदीप लारिया की सक्रिय भूमिका और सनातन सद्भाव संगठन का अटूट प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्तंभ बनेगा।
इस अवसर पर सनातन सद्भाव संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सेन, संरक्षक एड.अनिल कुमार जैन, उपाध्यक्ष एड.महेंद्र सिंह कौरव, संतोष कुमार राय, अशोक कुमार सेन, सुनील कुमार सेलट, नरेंद्र प्रकाश तिवारी, श्रीमती राधा राठौर, डॉ. जानकी पटेल, एड.करण जैन एवं मनीष दुबे सहित पदाधिकारी उपस्थित थे।











