शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना का साथ दिवसीय विशेष शिविर का सातवें दिवस समापन

विनम्रता जीवन का स्वभाव बनाएं – डॉ संजय खरे

शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना का साथ दिवसीय विशेष शिविर का सातवें दिवस समापन*
महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय का सात दिवसीय विशेष शिविर प्राचार्य डॉ आनंद तिवारी के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ सरिता जैन, डॉ अर्चना मिश्रा एवं डॉ आकर्षा तिवारी के नेतृत्व में सातवें दिवस दिनांक 14 फरवरी को गोदग्राम सुआताला में समापन समारोह संपन्न हुआ। समापन सत्र की शुरुआत मंचासीन अतिथियों को राष्ट्रीय सेवा योजना के बेज लगाकर और पुष्प भेंट करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य गीत के सामूहिक गान से हुई। मंचासीन महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ मधु स्थापक, डॉ स्वीटी मिश्रा, डॉ देवेंद्र कुशवाहा एवं डॉ आशालता पटेल द्वारा दिए गए उद्बोधनों से शिविरार्थियों को मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। तत्पश्चात कार्यक्रम अधिकारी डॉ अर्चना दुबे मिश्रा द्वारा शिविर में विभिन्न दिवसों में संपन्न हुई गतिविधियों की जानकारी दी |

प्रभारी प्राचार्य डॉ संजय खरे ने स्वयंसेवकों को एक दृष्टांत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब नदी अपने तेज बहाव में रहती है तो सभी पेड़ पौधों मकानों को बहा कर ले जाती है लेकिन उसी तेज बहाव में छोटी-छोटी घास नीचे झुक जाती है और वह सुरक्षित रहती है तो ऐसे ही जीवन में आप भी विनम्रता और झुकाव अपने स्वभाव में बनाए। स्वयंसेवकों को व्यक्तित्व विकास का महत्व बताया और अपने जीवन में विनम्र रहने के लिए प्रेरित किया| कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठन श्री आर. सी. प्रजापति भी मौजूद रहे| उन्होंने अपने उद्बोधन में कहां की स्वयंसेवकों के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना सामुदायिक सेवा के माध्यम से व्यक्तित्व विकास करना का काम करती है। यह योजना निस्वार्थ सेवा, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी, और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है। शिविरार्थियों में से चार स्वयंसेवकों से उनको प्राप्त अनुभवों का फीडबैक दिया।शिविर मैं सर्वाधिक योगदान के आधार पर तीनों इकाइयों से चार-चार स्वयं सेवकों को राष्ट्रीय सेवा योजना के स्मारकों से सम्मानित किया गया। तत्पश्चात स्वयंसेवकों को शिविर सहभागिता के प्रमाणपत्र एवं मेडल प्रदान किया गए। आभार डॉ सरिता जैन द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ आकर्षा तिवारी द्वारा किया गया | राष्ट्रगान के साथ समापन सत्र संपन्न हुआ।

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