
अहंकार त्याग ही महाशिवरात्रि का मूल संदेश -अविराज सिंह
खुरई। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर झंडा चौक, खुरई में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए युवा नेता अविराज सिंह ने महाशिवरात्रि के महत्व का विस्तार से वर्णन किया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अविराज सिंह ने महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व, भगवान शिव की महिमा तथा सनातन संस्कृति की महान परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में शिवशक्ति को समस्त शक्तियों में सर्वोपरि बताते हुए उपस्थित जनसमुदाय को धर्म, आस्था और आत्मसंयम का संदेश दिया।
अविराज सिंह ने कहा कि महा शिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना, तप, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह वह पावन रात्रि है जब शिवभक्त उपवास, पूजन और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से वर्ष भर के पूजन के समान फल प्राप्त होता है। यह पर्व हमें अहंकार त्याग, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
अविराज सिंह ने कहा कि महा शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को दूध अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव नीलकंठेश्वर हैं। समुद्र मंथन के समय निकले विष को उन्होंने अपने कंठ में धारण कर संसार को विनाश से बचाया था। विष धारण करने के कारण उनके कंठ में ज्वाला समान तपन रहती है, इसलिए भक्त उन्हें दूध और जल अर्पित कर शीतलता प्रदान करते हैं। माता पार्वती उनके कंठ में स्थित होकर उस विष को शरीर में फैलने से रोकती हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव को अनेक स्तोत्र प्रिय हैं, किंतु शिव तांडव स्तोत्र विशेष रूप से प्रभावशाली है। इसके श्रवण और पाठ से मन की अशांति दूर होती है, एकाग्रता बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कलियुग में यह स्तोत्र मानसिक तनाव को दूर करने का श्रेष्ठ माध्यम है। इससे मन की शुद्धि होती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अविराज सिंह ने अपने संबोधन में भगवान शिव की महिमा पर कहा कि शिव ही सृष्टि की सर्वोच्च शक्ति हैं। उन्होंने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में यह विवाद उत्पन्न हुआ कि उनमें से अधिक शक्तिशाली कौन है। इस विवाद के कारण सृष्टि का संतुलन डगमगाने लगा। तभी उनके मध्य एक दिव्य अग्नि स्तंभ, अग्नि शिवलिंग प्रकट हुआ। दोनों के समक्ष यह घोषणा हुई कि जो पहले उस शिवलिंग का छोर खोज लेगा, वही महान माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मा जी ऊपर की ओर और विष्णु जी नीचे की ओर उस अग्नि स्तंभ का अंत खोजने निकले, किंतु किसी को भी उसका छोर नहीं मिला। अंततः दोनों ने उस दिव्य स्वरूप को प्रणाम कर स्वीकार किया कि शिव ही इस सृष्टि की परम शक्ति हैं, उनसे बढ़कर कोई नहीं। यही महा शिवरात्रि का संदेश है ,अहंकार का त्याग और परम सत्य की स्वीकृति।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान शिव आदि योगी हैं, योग के आदि प्रवर्तक हैं। जिन्हें समाज स्वीकार नहीं करता, उन्हें भी शिव स्वीकार करते हैं, इसलिए उन्हें पशुपतिनाथ कहा जाता है। वे पशु-पक्षियों के भी ईश्वर हैं। उनकी आराधना देव, दानव, असुर, भूत-प्रेत सभी करते हैं। उनके त्रिशूल में तीनों गुणकृसत्व, रज और तम का प्रतीक समाहित है। गले का सर्प समयचक्र का प्रतीक है। शरीर पर धारण की गई भस्म सादगी और वैराग्य का संदेश देती है। उनकी जटाओं से मां गंगा का अवतरण हुआ और मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है। उनका तीसरा नेत्र इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण का प्रतीक है।
युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि जो भी सच्चे मन से भगवान शिव की उपासना करता है, वह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है। शिव तांडव स्तोत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास किया था। तब भगवान शिव ने अपने चरण के अंगूठे से पर्वत को दबाकर उसका अहंकार भंग किया। उसी समय रावण ने शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और अनेक वरदान प्राप्त किए।
उन्होंने कहा कि सभी पुरियों में काशी सबसे महान मानी जाती है, सभी नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, सभी मंत्रों में ओंकार मंत्र सर्वोपरि है और सभी शक्तियों में शिवशक्ति श्रेष्ठ है। इसी प्रकार सभी व्रतों में महा शिवरात्रि का व्रत सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष पूजा न कर सके, किंतु महा शिवरात्रि के दिन श्रद्धा से शिव आराधना करे, तो उसे वर्ष भर के पूजन का फल प्राप्त होता है।
इस अवसर पर श्री नर्मदेश्वर मंदिर, तिलकगंज, सागर में श्री रामराज्य सेवा समिति एवं समस्त शिवभक्तों द्वारा आयोजित भव्य पालकी यात्रा के स्वागत समारोह में भी अविराज सिंह शामिल हुए। वहीं तीन बत्ती स्थित जय महाकाल हिन्दू संगठन, सागर द्वारा आयोजित शिव बारात के भव्य स्वागत में तथा बांदरी की पालकी यात्रा में उन्होंने सहभागिता निभाई।
महा शिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर खुरई नगर सहित आसपास के क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। भव्य ‘शाही बारात’ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। खुरई और सागर क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर रहा। नगर के विभिन्नस्थानों पर भजन-कीर्तन, पूजन-अर्चन और शोभा यात्राओं का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।











