
नरयावली की विद्युत समस्याओं के समाधान की ओर बढ़ते कदम: विधायक लारिया की पहल पर ऊर्जा मंत्री ने नरयावली में 132/33 उच्च दाब उपकेंद्र की स्थापना के लिए आश्वस्त किया
भोपाल/20.02.2026: नरयावली विधानसभा क्षेत्र की वर्षों पुरानी विद्युत समस्याओं और अधोसंरचनात्मक बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ती नजर आ रही है। विधानसभा सत्र के दौरान क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया की प्रभावी पैरवी पर ऊर्जा मंत्री ने नरयावली में पृथक ‘132/33 के.व्ही. उच्च दाब उपकेंद्र’ की स्थापना के लिए आश्वस्त किया है। विधायक लारिया ने मकरोनिया मुख्यालय पर अत्यधिक निर्भरता और तकनीकी जटिलताओं को प्रमुखता से उठाते हुए क्षेत्र के विकास के लिए इस उपकेंद्र को अपरिहार्य बताया।
विधायक लारिया ने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि वर्तमान में नरयावली के अधिकांश हिस्सों में विद्युत आपूर्ति मकरोनिया स्थित उपकेंद्र से की जाती है। यह लाइन न केवल लंबी है, बल्कि गल्ला मंडी और औद्योगिक क्षेत्र के भारी विद्युत भार के कारण अक्सर ओवरलोडिंग की समस्या से जूझती रहती है। सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती इस विद्युत लाइन का सैन्य क्षेत्र (आर्मी एरिया), नगर पालिका और छावनी परिषद जैसे संवेदनशील और सघन क्षेत्रों से होकर गुजरना है। विशेष रूप से सैन्य क्षेत्र में लाइन के रखरखाव और मरम्मत के लिए लंबी अनुमति प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसके कारण घंटों तक क्षेत्र की जनता को विद्युत कठिनाइयों से गुजरना में पड़ता है। इस ‘प्रशासनिक और तकनीकी बाधा’ को दूर करने के लिए नरयावली में स्वतंत्र उपकेंद्र की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
क्षेत्र के आर्थिक ढांचे को मजबूती देने के दृष्टिकोण से भी यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नरयावली के औद्योगिक गलियारे और कृषि प्रधान ग्रामीण अंचलों में निर्बाध बिजली की उपलब्धता न केवल उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगी। विधायक की तर्कसंगत प्रस्तुति पर गंभीरता दिखाते हुए ऊर्जा मंत्री ने जनहित में इस नए उपकेंद्र की स्थापना के लिए अपनी सहमति दी और स्पष्ट किया कि जब तक स्थाई उपकेंद्र मूर्त रूप नहीं ले लेता, तब तक वैकल्पिक प्रबंधों के जरिए आपूर्ति सुधारी जाएगी। क्षेत्र की जनता की कठिनाइयों को सदन में प्रभावी ढंग से रखवाकर समाधान का आश्वासन प्राप्त करना विधायक प्रदीप लारिया की एक बड़ी विकासपरक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।










