
सागर विधानसभा में शासकीय भूमि अतिक्रमण का मुद्दा गूंज —विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन के प्रश्न पर राजस्व मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी
सागर | मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन द्वारा सागर विधानसभा क्षेत्र में शासकीय भूमियों पर अतिक्रमण एवं उनके उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया, जिस पर राजस्व विभाग की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत किया गया।
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने प्रश्न क्रमांक 1643 के उत्तर में बताया कि तहसील सागर नगर अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र सागर में मौजा कनेरादेव, तिलीमाफी, पिपरिया, उदयपुरा, धर्मश्री एवं वामनखेड़ी में शासकीय भूमि उपलब्ध है तथा वर्तमान में उक्त भूमि शासन के अधिपत्य में है। इन भूमियों का विस्तृत विवरण विधानसभा पुस्तकालय में परिशिष्ट के रूप में उपलब्ध कराया गया है।
मंत्री श्री वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत तीन वर्षों में सागर विधानसभा क्षेत्र के मौजा सागरखास, कनेरादेव, ललईटौरी, करीला एवं धर्मश्री स्थित शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। शासकीय भूमि के संरक्षण हेतु मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 (संशोधित 2018) के अंतर्गत आवश्यक कानूनी प्रावधान लागू हैं, हालांकि इसके लिए पृथक बजट प्रावधान नहीं किया गया है।
इसके अतिरिक्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि रिक्त पड़ी शासकीय भूमियों का निराकरण म.प्र. नजूल निर्वतन निर्देश 2020 के अंतर्गत किया जाता है तथा वर्तमान प्रावधानों में पी.पी.पी. मॉडल के माध्यम से भूमि उपयोग का प्रावधान शामिल नहीं है।
विधानसभा में उठाए गए इस प्रश्न को सागर शहर में शासकीय भूमि संरक्षण, अतिक्रमण नियंत्रण एवं भविष्य की विकास योजनाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











