होलिका दहन शुभ मुहूर्त (शंका समाधान)

होलिका दहन शुभ मुहूर्त (शंका समाधान)

भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परन्तु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिये। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। धर्मसिन्धु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया है। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भद्रा मुख में किया होली दहन अनिष्ट का स्वागत करने के जैसा है जिसका परिणाम न केवल दहन करने वाले को बल्कि शहर और देशवासियों को भी भुगतना पड़ सकता है। किसी-किसी साल भद्रा पूँछ प्रदोष के बाद और मध्य रात्रि के बीच व्याप्त ही नहीं होती तो ऐसी स्थिति में प्रदोष के समय होलिका दहन किया जा सकता है। कभी दुर्लभ स्थिति में यदि प्रदोष और भद्रा पूँछ दोनों में ही होलिका दहन सम्भव न हो तो प्रदोष के पश्चात होलिका दहन करना चाहिये।

निर्णय सिंधु के भी मतानुसार होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोष काल व्यापिनी – फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन मुहूर्त

इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा केवल 02 मार्च को ही प्रदोष व्यापिनी है। 03 मार्च को पूर्णिमा तिथि सायं 05:07 पर समाप्त हो रही है। 02 मार्च को भद्रा पृथ्वी लोक की पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही सायं 05:55 से अंत रात्री 03 मार्च की प्रातः 05:28 पर समाप्त हो रही है।

भद्रा पूँछ – 02 मार्च को मध्यरात्री 01:05 से रात्री 02:35 बजे तक रहेगी।

भद्रा का मुख 02 मार्च रात्री 02:35 से अंतरात्रि 04:31 बजे तक रहेगा।

धर्म सिंधु के मतानुसार〰️
फाल्गुनीपौर्णमासी मन्वादिः ॥ सा पौर्वाह्निकी इयमेव होलिका ।। सा प्रदो-षव्यापिनी भद्रारहिता ग्राह्या ॥ दिनद्वये प्रदोषव्याप्तौ परदिने प्रदोषैकदेशव्याप्तौ वा परैव ॥ पूर्वदिने भद्रादोषात् ॥ परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने प्रदोषे भद्रासत्त्वे यदि पूर्णिमा परदिने सार्धत्रियामा ततोधिका वा तत्परदिने च प्रतिपद्-वृद्धिगामिनी तदा परदिने प्रतिपदि प्रदोषव्यापिन्यां होलिका ॥ उक्तविषये यदि प्रतिपदो द्वासस्तदा पूर्वदिने भद्रापुच्छे वा भद्रामुखमात्रं त्यक्त्वा भद्रायामेव वा होलिकादीपनम् ॥ परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने यदि निशीथात्प्राक् भद्रासमा-प्तिस्तदा भद्रावसानोत्तरमेव होलिकादीपनम् ॥ निशीथोत्तरं भद्रासमाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव ॥ प्रदोषे भद्रामुखव्याप्ते भद्रोत्तरं प्रदोषोत्तरं वा ॥ दिनद्वयेपि पूर्णिमायाः प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिन एव भद्रापुच्छे तदलाभे भद्रायामेव प्रदोषो-त्तरमेव होलिका ॥ रात्रौ पूर्वार्धभद्राया ग्राह्यत्वोक्तेः ॥ न तु पूर्वप्रदोषादौ चतुर्द-श्यां न वा परत्र सायाह्नादौ ॥ दिवा होलिकादीपनं तु सर्वग्रन्थविरुद्धम् ॥

अर्थात – फागुन की पूर्णिमा मन्वादि कहाती है, वह पूर्वाह्वव्यापिनी ग्रहण करनी चाहिये। इसी को होलिका कहते हैं वह प्रदोषव्यापिनी और भद्रा से रहित ग्रहण करनी चाहिये। यदि पूर्णिमा दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी होय वा परदिन में प्रदोष के एकदेश (छोटे से भाग) में भी होय तो परली (अगली) ग्रहण करनी। क्योंकि, पहिले दिन भद्र का दोष है और दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी न होय और पहिले दिन प्रदोष के समय भद्रा हो तो जो दूसरे दिन पूर्णिमा साढे तीन प्रहर हो वा उतने से भी अधिक हो और उससे परे प्रतिपदा बढ गई होय तो परले दिन प्रदोष व्यापिनी प्रतिपदा में ही होली करनी चाहिये। और जो पूर्व कहे विषय में प्रतिपदा घट गई होय तो, भद्रा की पुच्छ वा भद्रा के मुख को छोडकर वा भद्रा में ही होलिका का दाह करै । और जो परले (अगले) दिन प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा न हो और पहिले दिन अर्द्ध रात्रि से पूर्व ही भद्रा की समाप्ति हो जाय तब तो भद्रा के अंत में ही होलिका का दाह करना चाहिए। और जो अर्द्धरात्र से पीछे भद्रा की समाप्ति होय तो भद्रा के मुख को त्यागकर वा भद्रा में ही होली दीपन करना चाहिए। और जो प्रदोष के समय भद्रा का मुख होय तो होलीदीपन भद्रा से पीछे वा प्रदोष के अंत में करै। जो दोनों दिन पूर्णिमा प्रदोष के समय न होय और पहिले दिन भद्रा होय तो पहिले दिन ही भद्रा की पुच्छ में जो वह न मिलै तो भद्रा में ही प्रदोष के अंत में होलिका का दाह करें। क्योंकि, रात्रि में पूर्वार्द्ध भद्रा का ग्रहण शास्त्र से सिद्ध है। परन्तु चतुर्दशी के प्रदोष में वा परले दिन सायं आदि में न करै। दिन में होली का दाह सर्वशास्त्र से विरुद्ध है अर्थात् किसी में नहीं लिखा।

भद्रा पूँछ – 02 मार्च को मध्यरात्री 01:05 से रात्री 02:35 बजे तक रहेगी।

शास्त्र आज्ञा अनुसार मध्य रात्री बाद तक भद्रा व्याप्त हो तो भद्रा मे ही होलिका दहन कर लेना चाहिये अतः 02 मार्च रात्रि 01 से रात्री 02 बजकर 35 मिनट तक की अवधि मे होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है ।
रंगवाली होली (धुलण्डी) 👉 04 मार्च शुक्रवार को मनाई जाएगी। कर्मकांड ज्योतिष विषेशज्ञ – डॉ अनिल दुबे वैदिक देवरी बिछुआ 9936443138

Leave a Comment

Read More