
महिलाओं के योगदान के बिना विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विश्वविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के रंगनाथन भवन में “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस” के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. प्रमोद कुमार खरे (पूर्व विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान एवं जैव-प्रौद्योगिकी) ने सी. वी. रमन के वैज्ञानिक आविष्कारों का उल्लेख करते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अवसरों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल समर्पित एवं निरंतर परिश्रम की है। कार्यक्रम की आयोजक प्रो. श्वेता यादव, निदेशक (अनुसंधान एवं विकास), ने महिलाओं के लिए अवसरों की समानता एवं स्वस्थ कार्यस्थल वातावरण सुनिश्चित करने पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में पुरुष और महिला एक गाड़ी के दो पहियों के समान हैं; अतः राष्ट्र की प्रगति के लिए आधी आबादी को अधिक अवसर प्रदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं अनुज, अदिति, कनिका, हितेंद्र, एकता, रक्षा, प्रियदर्शनी एवं आकाश ने अपने विचार व्यक्त करते हुए महिलाओं को समान अवसर एवं स्वस्थ सामाजिक वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे वे विकसित भारत को दोगुनी गति प्रदान कर सकें। छवि जैन ने पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से समय-समय पर महिलाओं द्वारा विकसित भारत हेतु दिए गए योगदान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रिया नील बसु एवं डॉ. संदीप कुमार (सहायक प्रोफेसर, जंतु विज्ञान) द्वारा किया गया, जबकि प्रशासनिक कार्यवाही सदस्य सचिव डॉ. बृजेश कुमार मौर्य ने संपादित की।











