विश्वविद्यालय : फार्मास्युटिकल साइंसेज़ श्रेणी में दो शोधार्थियों को मिला एमपीसीएसटी यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड

विश्वविद्यालय : फार्मास्युटिकल साइंसेज़ श्रेणी में दो शोधार्थियों को मिला एमपीसीएसटी यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड

सागर| भोपाल। मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित 41वें एम.पी. यंग साइंटिस्ट कांग्रेस में फार्मास्युटिकल साइंसेज़ श्रेणी के अंतर्गत डॉ. हरीसिंह गौर विश्ववि‌द्यालय सागर के फार्मास्युटिकल साइंसेज़ विभाग के दो पीएचडी शोधार्थियों प्रियांशु नेमा और हर्षिता सिंघई को प्रतिष्ठित एमपीसीएसटी यंग साइंटिस्ट अवॉर्डसे सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उनके अभिनव एवं उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया। प्रियांशु नेमा को उनके शोध विषय मधुमेह-रोधी चिकित्सीय विकास के लिए एकीकृत ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और कम्प्यूटेशनल ड्रग डिस्कवरी के लिए पुरस्कृत किया गया| जिसमें मधुमेह के उपचार हेतु आधुनिक ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और कम्प्यूटेशनल तकनीकों के समन्वय से नई औषधीय संभावनाओं का विकास किया जा रहा है।
वहीं हर्षिता सिंघई को उनके शोध कार्य स्तन कैंसर के उपचार के लिए उत्तेजना-प्रतिक्रियाशील सह-युक्त लिपोसोमल दवा वितरण प्रणाली के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। उनके शोध में स्तन कैंसर के उपचार के लिए उन्नत लिपोसोमल ड्रग डिलीवरी सिस्टम विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है, जो लक्षित एवं प्रभावी उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एमपीसीएसटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्दे श्य नवीन और उपयोगी शोध को प्रोत्साहित करना तथा युवा वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान कार्य के लिए मंच प्रदान करना है। इस उपलब्धि पर शोधार्थियों के मार्गदर्शक डॉ. उमेश के. पाटिल, डॉ. सुशील काशव और डॉ. अश्मिता गजभिये ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विभाग और विश्ववि‌द्यालय के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। एमपीसीएसटी द्वारा युवा वैज्ञानिकों को उनके शोध कार्यों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। इसी सहयोग के तहत प्रियांशु नेमा वर्तमान में आईएलएस, भुवनेश्वर में डॉ. अंशुमान दीक्षित के मार्गदर्शन में अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल दोनों शोधार्थियों के लिए, बल्कि विश्ववि‌द्यालय के लिए भी गर्व का विषय है और यह प्रदेश में वैज्ञानिक शोध को नई दिशा देने का कार्य करेगी।

Leave a Comment

Read More