जावरा की बबली गंभीर: छोटे हाथों से बड़े सपने, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित

रतलाम mp
रिपोर्टर राहुल बैरागी
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अपने हुनर से पूरे देश में नाम रौशन कर रही हैं बबली गम्भीर,

जावरा की बबली गंभीर राष्ट्रपति पुरस्कार से हो चुकी हैं सम्मानित,

बबली गम्भीर अपने नन्हे-नन्हे हाथों से ढोलक भी बजाती ओर स्कूटर भी चलाती है,

जिंदगी जीना तो आसान बात है लेकिन जिदंगी में एक अलग मुकाम पाना बहुत ही मुश्किल , खास कर जब आपके रास्ते में एक नहीं कई कांटे हो। इन मुश्किलों से वहीं लड़ सकता है जिसमें हिम्मत और मेहनत करने का जज्बा होता है। इसी हिम्मत का उदाहरण है जावरा की रहने वाली बबली गंभीर, गोल्डन हाथों के साथ पैदा हुई 50 साल की बबली इस समय अपना ब्यूटीपार्लर चला रही है। जन्म से ही बबली के हाथ सिर्फ कोहनी तक है और वह मुड़ते नहीं है। 2013 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ 11 अन्य नेशनल अवार्ड हासिल करने वाली बबली ने अपने जीवन में कई तरह की मुश्किलों का सामना किया है।

आइए हम आपको बताते है बबली गंभीर के जीवन की संघर्ष भरी कहानी बबली गंभीर ने बताया कि बचपन में जिन हाथों की वजह से उन्हें ताने सुनते पड़ते थे आज उन्हीं हाथों की क्रिएटिविटी के कारण वह पूरे देश में जानी जाती है। जन्म के समय उनकी विकलांगता को देखते हुए उनके पिता के एक दोस्त ने बबली को मारने का सुझाव दिया था लेकिन बबली के पिता ने कहा कि वह उसका गुरुर है और उन्होंने अपने दोस्त से हमेशा के लिए नाता तोड़ दिया। बबली के पिता ने बबली को जीवन में कभी भी हार मानने नहीं दी। बबली की यह हालत देख कर उसकी मां हमेशा चिंतित रहती लेकिन उसके पिता ने उसे दूसरा जीवन दिया। उन्होंने बबली को जीवन में आगे बढ़ने और सपने देखने का रास्ता दिखाया,

हर साल 8 मार्च को पूरे विश्व में महिलाओं के योगदान एवं उपलब्धियों की तरफ लोगो का ध्यान क्रेंदित करने के लिए महिला दिवस मनाया जाता है। महिला दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नारी को समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाना और उसके स्वयं में निहित शक्तियों से उसका ही परिचय कराना होता है। ऐसे में आज हम आपके सामने एक ऐसी महिला की कहानी लेकर आए हैं, जो अपनी हुनर की बदौलत पूरे देश में अपना नाम रौशन कर रही है।

रतलाम के जावरा शहर की ब्यूटीशियन बबली गंभीर के दोनों हाथ बचपन से छोटे (कोहनी से भी छोटे साथ ही दोनों हाथों में कुल 5 ही उंगलिया हैं, एक हाथ के पंजे में 3 उंगलिया हैं तो दूसरे हाथ के पंजे में 2 ही उंगली है) हैं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इंग्लिश लिटरेचर से एमएम करने के साथ ही ब्यूटीशियन में खुद को स्थापित किया है। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार, वुमन भास्कर अवार्ड जैसे कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।

कई पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं बबली ब्यूटिशियन बबली गंभीर को असाधारण प्रतिभा के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्ट सृजनशील वयस्क पुरस्कार-2013 से 3 दिसम्बर 2013 को सम्मानित किया गया। बबली गंभीर को यह पुरस्कार विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था। जयपुर के होटल उनियारा में नगर की ब्यूटीशियन जादुई हाथों वाली बबली गंभीर को नेशनल वुमन एक्सीलेंस अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया था।

अपने दम पर बनाई पहचान

बबली गंभीर ने अपने संघर्ष की कहानी में हमें बताया कि उनके दोनों हाथों में मात्र पांच उंगलियां होने से किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज उनका खुद का ब्यूटी पार्लर है। लोग उन्हीं के हाथों से खुद को सुंदर दिखाना चाहते हैं। गंभीर ने कहा कि माधुरी ने मुझे गले से लगाया ये मेरी जिन्दगी का सबसे खुशनुमा पल था। माधुरी की हंसी और चेहरा जितना खूबसूरत है वो अंदर से भी उतनी ही खूबसूरत हैं। उनके जैसी हस्ती के साथ खड़े हो कर सम्मानित होना गर्व की बात है।

पिता ने हर मोड़ पर दिया साथ
बबली बताती हैं कि आज मैं जो कुछ भी हूं मेरे पिता की बदौलत हूं, पापा ने मझे आगे बढ़ना सीखाया और आज मैं जो कुछ हूं पापा की वजह से हूं और मैंने जीवन में अपने आपको कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया। ब्यूटी पार्लर में ज़्यादा काम हाथों का होता है और चेहरे की खूबसूरती के लिए बारीकी से उंगलियों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मैंने लोगों बताया कि जो मेरी उंगलियों को और मेरे छोटे-छोटे हाथों को बदसूरत बताते थे कि मेरे हाथ ऐसे खराब नहीं हैं और महिला किसी पर बोझ नहीं है।

बबली की बड़ी दीदी हैं उनकी हिम्मत साथ ही बबली गंभीर ने बताया कि उन्होंने काफ़ी महिलाओं को ब्यूटीशियन का काम सिखाया और बताया कि महिला किसी की मोहताज नहीं होती। मेरा कोई सहारा नहीं था और मुझे किसी ने कोई सपोर्ट नहीं किया। बस मेरी दीदी मेरी हिम्मत है और उनकी बातें मेरे दिल दिमाग में घूमती रहती हैं और मुझे याद दिलाती हैं कि महिला हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। साथ ही गंभीर ने बताया कि में हर काम अच्छे से कर लेती हूं। घर के कामो में भी खाना बनाने से लेकर घर के सभी काम और मैं मार्केट में अपनी स्कूटी से पार्लर आती-जाती हूं।

एक बार बबली ने एक महिला को किसी की थ्रेडिंग करते हुए देखा तो बबली ने धागा लेकर प्रेक्टिक्स करनी शुरु की। कुछ ही दिनों में वह धागा चलाना सीख गई और फिर ब्यूटी पार्लर का काम सीखा। इसके बाद भी बबली की मुश्किले कम नहीं हुई, बबली पार्लर खोलना चाहती थी लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। तब बबली ने कुछ देर कोचिंग देकर पैसे जोड़े ओर जावरा के छोटे शहर में पहला ब्यूटी पार्लर खोला। आज बबली अपने उन्हीं खूबसूरत हाथों के साथ लोगों को खूबसूरत बना रही हैं जिनके कारण कभी उन्हें और उनके परिवार को ताने सुनने पड़ते थे। ब्यूटीशियन होने के साथ-साथ बबली इंटीरियर डिजाइनर और पेंटर भी है। यही नहीं वह बहुत अच्छा ढोलक भी बजाती है। वह खुद सिलाई-कढ़ाई करते हुए गाड़ी भी चलाती है।

आज बबली अपने जीवन से बहुत खुश है और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही। बबली की लाइफस्टोरी यही संदेश देती है कि दुनिया में कोई स्पोर्ट करें या न करें खुद पर विश्वास रख कर आगे बढ़ना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करना चाहिए।

बबली गंभीर की उंगलियों के हुनर और कला को देखकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे कि कोई इतने छोटे हाथों से और दोनों हाथों की कुल मिलाकर पांच उंगलियों से इतना बारीक काम इतनी तेज़ी से कैसे कर सकता हैं। कई महिलाओं को बबली गंभीर से काफ़ी हौसला मिलता होगा।

बाइट – बबली गम्भीर

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