समाजसेवा की मिसाल: ‘सिंटू’ के नाम से पहचाने जाने वाले पारितोष कटारे जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित

समाजसेवा की मिसाल: ‘सिंटू’ के नाम से पहचाने जाने वाले पारितोष कटारे जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित
सागर। निस्वार्थ समाजसेवा और जमीनी स्तर पर मानवीय सहायता के लिए पहचाने जाने वाले पारितोष कटारे, जिन्हें शहरवासी आत्मीयता से ‘सिंटू कटारे’ के नाम से जानते हैं, को जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। 6 मार्च को कलेक्टर संदीप जी आर ने उन्हें यह प्रशस्ति पत्र सौंपकर उनकी सराहना की। गौरतलब है कि यह सम्मान मूलतः गणतंत्र दिवस पर दिया जाना था, लेकिन तकनीकी कारण से इसमें दो माह का विलंब हुआ। दरअसल, प्रशासन ने प्रमाण पत्र उनके आधिकारिक नाम ‘पारितोष’ के नाम से बनाया था, जबकि शहर में वे ‘सिंटू’ के नाम से लोकप्रिय हैं। मंच से पुकारे जाने पर पहचान स्पष्ट न होने के कारण उन तक सूचना समय पर नहीं पहुंच सकी थी।
सिंटू कटारे की सामाजिक प्रतिबद्धता की मिसाल पूरा शहर देता है। वे उन कठिन परिस्थितियों में मदद के लिए खड़े होते हैं, जहाँ अक्सर लोग पीछे हट जाते हैं। श्मशान घाटों पर लावारिस दिवंगतों का अंतिम संस्कार करना हो या सड़क दुर्घटनाओं और आगजनी जैसी आपातकालीन स्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाना, सिंटू सदैव तत्पर रहते हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने प्रवासी मजदूरों की सहायता और राशन वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी संकटकाल में श्री कटारे के समक्ष एक ऐसा विषय आया। जिसमें दो वृद्ध दंपती उनके पास आए और बताया कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। हम लोग चाहते हैं कि हमारी बेटियों का ब्याह हमारे जीवित रहते हो जाए। तब सिंटू ने अपने कुछ समाजसेवी मित्रों का सहयोग लेते हुए उन दो गरीब कन्याओं का विवाह सम्पन्न कराया।
उनकी सेवा का दायरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, वे बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गोवंश के उपचार व मृत पशुओं के ससम्मान दफनाने की व्यवस्था भी स्वयं करते हैं। कलेक्टर संदीप जी आर ने उनके जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें मध्यप्रदेश सरकार की ‘राहवीर’ योजना की जानकारी भी दी, जिसके तहत सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सम्मानित किया जाता है। सिंटू के हालिया सम्मान पर शहर के गणमान्य नागरिकों और उनके शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया है।

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