
कहानी सच्ची है
जैविक एवं प्राकृतिक खेती की प्रेरक पहल
सागर 10 मार्च 2026
ग्राम गुलाबवा के प्रगतिशील किसान उमेश पटेल एवं अवधेश अहिरवार ने पूरी तरह से जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर एक नई मिसाल कायम की है। दोनों किसानों ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों को त्यागकर प्राकृतिक पद्धति से खेती प्रारंभ की है। वे नियमित रूप से जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, बीजामृत जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग करते हैं तथा गोबर खाद और जैविक पोषक तत्वों से फसलों की देखभाल करते हैं। उनका उद्देश्य कम लागत में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करना है। इन किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कुछ नई एवं औषधीय फसलों की ओर भी कदम बढ़ाया है। उदाहरण के रूप में वे चिया तथा अश्वगंधा जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उनकी खेती में विविधता आई है और आय के नए स्रोत भी बने हैं। सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि गांव के कुछ युवा भी कृषि में रुचि ले रहे हैं और कम लागत में बेहतर उत्पादन की दिशा में काम कर रहे हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में नई सोच और सकारात्मक बदलाव का संकेत है। इन किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियां और फल प्रत्येक रविवार को स्थानीय जैविक हाट बाजार में बिक्री हेतु लाए जाते हैं। वहां उन्हें अपनी उपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे वे अत्यंत संतुष्ट हैं और इस व्यवस्था को नियमित रूप से जारी रखना चाहते हैं।
उमेश पटेल और अवधेश अहिरवार की यह पहल अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि सही विपणन व्यवस्था के साथ यह आर्थिक रूप से भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकती है। आज वे अपने क्षेत्र में एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहे हैं।











