आईएमए सागर का वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक पर संदेश : 40 साल से ज्यादा उम्र होने पर जरूर कराएं आंखों की जांच, भारत में करीब 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित

आईएमए सागर का वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक पर संदेश : 40 साल से ज्यादा उम्र होने पर जरूर कराएं आंखों की जांच, भारत में करीब 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित

सागर, 18 मार्च 2026 – इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा और स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्ततत्वाधान से आज इंद्रा नेत्र अस्पताल , में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर एक विशेष जागरूकता शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।शिविर का लक्ष्य ग्लूकोमा रोग के कारण होने वाली दृष्टि हानि को रोकने के लिए शीघ्र पहचान, नियमित नेत्र जाँच और समय पर उपचार के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का था .
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अदिति दूबे ने समय पर निदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्लूकोमा अक्सर धीरे-धीरे विकसित होता है और कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, यही कारण है कि कई मरीज़ों के रोग का तब तक पता नहीं चल पता जब तक कि दृष्टि दोष या लाइलाज अंधापन न हो जाए.
मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ जितेंद्र सराफ ने बताया के ऑप्टिक तंत्रिका का मूल्यांकन और इंट्राओक्युलर दबाव (अंतःनेत्र दाब) का मापन सहित नियमित नेत्र जाँच ग्लूकोमा का शीघ्र पता लगाने में मदद कर सकती है. शीघ्र निदान और उचित प्रबंधन के साथ, रोग की प्रगति को अक्सर काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. उन्होंने बताया के हालांकि पहले से खोई हुई दृष्टि वापस नहीं आ सकती, लेकिन शुरुआती निदान और दवा (आई ड्रॉप्स), लेजर या सर्जरी से आगे के नुकसान को रोका जा सकता है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ तल्हा साद ने बताया कि भारत में ग्लूकोमा से अनुमानित 1.2 करोड़ लोग प्रभावित हैं, जिससे देश विश्व स्तर पर ग्लूकोमा से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है. चिंताजनक रूप से, ग्लूकोमा के लगभग 90% मामले अभी भी निदान नहीं हो पाए हैं,उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 40 साल से ज्यादा की उम्र होने पर हर व्यक्ति को अपनी आंखों की जांच हर साल जरूर करानी चाहिए ताकि आंखों में किसी भी तरह का दृष्टि दोष होने पर समय पर उसका उपचार किया जा सके.

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