
साहित्य समाज का दर्पण है जो संस्कार और नैतिकता को नई दिशा देता है — रिशांक तिवारी
सागर साहित्य महोत्सव एवं पुस्तक मेला के अंतिम दिन उमड़ा उत्साह, युवाओं और साहित्य प्रेमियों की रही सक्रिय भागीदारी
स्कूल शिक्षा विभाग सागर, महिला एवं बाल विकास विभाग सागर तथा अजीज प्रेम जी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सागर साहित्य महोत्सव एवं पुस्तक मेला के अंतिम दिन कार्यक्रम ने अपनी गरिमा और व्यापक सहभागिता से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष रिशांक तिवारी विशेष रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने आयोजन का अवलोकन करते हुए पुस्तक स्टॉल्स का भ्रमण किया तथा साहित्य प्रेमियों से संवाद स्थापित किया।
अपने संबोधन में रिशांक तिवारी ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि समाज को संस्कारित करने और उसे सही दिशा देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महोत्सव युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी विभागों एवं संस्थाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समन्वित प्रयास ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
महोत्सव के अंतिम दिन भी विभिन्न गतिविधियों ने लोगों को विशेष रूप से आकर्षित किया। पुस्तक प्रदर्शनी में विभिन्न प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकों को देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। साहित्यकारों एवं युवा लेखकों के साथ संवाद, काव्य पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और अधिक जीवंत बना दिया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की सक्रिय भागीदारी पूरे आयोजन की विशेषता रही।
इस अवसर पर शहर के बुद्धिजीवी, शिक्षक, विद्यार्थी, साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। पूरे आयोजन के दौरान सकारात्मक, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक वातावरण बना रहा जिसने सभी को प्रभावित किया।











