
महात्मा ज्योतिबा फुले ने शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्य किया – कुलपति
सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर चेयर के द्वारा डॉ. अंबेडकर मेमोरियल लेक्चर जिसका विषय सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा: फुले का दृष्टिकोण विषय पर संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर, डॉ. अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले मानते थे की शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक परिवर्तन आ सकता है इसलिए आज आवश्यकता है शिक्षा के माध्यम से रोजगार और नीतिगत शिक्षा देने की| उन्होंने कहा कि नीतिगत शिक्षा आज की आवश्यकता है, शिक्षा के माध्यम से ही समग्र विकास हो सकता है| महात्मा ज्योतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया| कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने बताया कि वह ज्योतिबा फुले विश्वविद्यालय गए थे और वहां पर उन्होंने देखा कि शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के लिए भी कार्य किया जा रहा है| ज्योतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले स्मारक मैं भी वह गए और वहां पर उन्होंने पुष्प अर्पित किए | आज के युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल विकास की आवश्यकता है और हमारे युवाओं को हमारे महापुरुषों से प्रेरणा लेकर समाज के लिए कार्य करने की आवश्यकता है| कार्यक्रम में अतिथि एवं वक्ता श्री सतीश कुमार ने कहा कि फुले जी का जन्म उस समय हुआ था जब समाज में अनेक कुरीतियां थी| महात्मा ज्योतिबा फुले मानते थे कि इनका एक ही समाधान है वह है शिक्षा|
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अनिल तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि समानता आधारित मानवतावादी सोच के आधार पर समाज में परिवर्तन लायें, जितना त्याग ज्योतिबा फुले ने किया उतना त्याग समाज परिवर्तन के लिए उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने भी किया| शिक्षा के लिए रात्रि विद्यालय, विधवाओं के लिए अनाथालय, अंतर जाति विवाह फुले जी का समाज परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था| फुले जी का जीवन समाज में भेदभाव मुक्त शिक्षित समाज बनाने का था| कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक डॉ. अंबेडकर चेयर डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि जिस व्यक्ति ने समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन लगा दिया, उन व्यक्तियों का जीवन अमर हो जाता है| डॉ. गौर, डॉ. अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले हम सब युवाओं के लिए आदर्श हैं, विकसित भारत बिना महिला शिक्षा एवं सशक्तिकरण के बिना अधूरा है और इस काम को पूर्व में ही ज्योतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले ने प्रारंभ कर दिया था| ज्योतिबा फुले के 200 वर्ष पर डॉ. अंबेडकर चेयर संगोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता एवं युवाओं के बीच ज्योतिबा फुले के विचारों को ले जाने के लिए हम पूरे वर्ष कार्य करेंगे| कार्यक्रम में डॉ. रूपाली सैनी, डॉ. दीप्ति जाट, डॉ. शशि कुमार सिंह, डॉ. सुनील सेन, आर. के. पाल, डॉ. योगेश पाल, डॉ. आयुष गुप्ता, डॉ. शिवा शंकर यादव, डॉ. रमाकांत, डॉ. प्रवीण, डॉ. नवीन, डॉ. संजय, डॉ. अवधेश कुमार, अजब सिंह एवं द्वितीय सत्र में प्रदीप विश्वकर्मा, पूनम सिंह राठौड़, हिमांशु गुप्ता कृष्णा नगर, हिमांशु गोयल, डॉ. सौम्या पांडे, हिमांशु लारिया डॉ. अभय, बालचंद, जितेंद्र आदि ने शोध पत्र का वाचन किया| कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन डॉ. आर टी बेंद्रे ने किया|











