
भगवान लव-कुश के आदर्शों को आत्मसात कर शिक्षा और संस्कार से समाज को नई दिशा दें : गोविंद सिंह राजपूत
सागर, 20 सितंबर 2026। भगवान श्रीराम के पुत्र भगवान लव-कुश साहस, संस्कार, शिक्षा, स्वाभिमान, न्याय और सत्य के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य और संस्कार का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। आज आवश्यकता है कि हम भगवान लव-कुश के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य देने का संकल्प लें। यह बात मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा सुरखी विधायक गोविंद सिंह राजपूत ने अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा द्वारा आयोजित भगवान लव-कुश जन्मोत्सव एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही।
युवाओं को शिक्षा, संस्कार और अवसर देना जरूरी
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भगवान लव-कुश का स्मरण करते हुए कहा कि कुशवाहा समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। समाज ने कृषि, शिक्षा, व्यापार, उद्यम, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी है। युवाओं को अच्छी शिक्षा, संस्कार, कौशल और आगे बढ़ने के अवसर मिलें तो वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी दिशा में सुरखी विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लास शुरू की गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
मंत्री ने कहा कि केवल स्कूल भवन बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधन, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। हमारा प्रयास है कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र का बच्चा गांव में रहता हो या शहर में, उसे अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर मिलें।
युवा नौकरी लेने वाले ही नहीं, रोजगार देने वाले भी बनें






