
अवैध डी.ए.पी. उर्वरक भंडारण एवं विक्रय पर दर्ज की गई एफ.आई.आर.
सागर 06 नवम्बर 2025
कलेक्टर संदीप जी.आर. के निर्देशन एवं अनुविभागीय राजस्व अधिकारी श्री अमन मिश्रा के मार्गदर्शन में दिनांक 05/11/2025 को राजस्व, कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त दल द्वारा डी.ए.पी. का अवैध भंडारण एवं विक्रय पर कार्रवाई की गई। प्राप्त सूचना के आधार पर पंडापुरा वाघराज वार्ड सागर में स्थित लखन पटैल के खाली मकान में छापामार कार्रवाई के दौरान डी.ए.पी. उर्वरक की 60 बोरियां संदिग्ध पाई गईं। इन बोरियों का बिना किसी बिल के संधारण होना पाया गया।
मौके पर उपस्थित गौरव साहू से पूछताछ करने पर बताया गया कि उक्त उर्वरक सचिन साहू निवासी यादव कॉलोनी तहसील सागर ने लखन पटैल से मकान किराये पर लेकर अवैध उर्वरक भंडारण कर विक्रय हेतु मुझे एवं अजय रैकवार निवासी यादव कॉलोनी तहसील सागर से करवाता है। उर्वरक लाइसेंस, उर्वरक के प्राप्त स्रोत, बिल आदि संबंधी कोई वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
कृषक पप्पू अहिरवार पिता हलकन अहिरवार, ग्राम सिलेरा विकासखंड सागर ने अपने लिखित कथन में बताया कि डी.ए.पी. उर्वरक 1500 रुपये प्रति बोरी विक्रय करने हेतु आया था। संयुक्त दल द्वारा डी.ए.पी. उर्वरक भंडारण स्थल का निरीक्षण किया गया, जिसमें डी.ए.पी. उर्वरक की कुल 60 बोरियां पाई गईं।
उर्वरक निरीक्षक सह कृषि विकास अधिकारी द्वारा उर्वरक का नमूना लेकर, पंचनामा तैयार कर, उर्वरक का परिवहन कर मोतीनगर थाना में सुपुर्दगी दी गई। लाइसेंस न होना एवं उर्वरक के स्रोत की जानकारी संबंधितों द्वारा उपलब्ध नहीं कराने के कारण सचिन साहू, अजय रैकवार एवं गौरव साहू के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 व 7 (अवैध भंडारण, कालाबाजारी) तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 7 के तहत प्राथमिकी (एफ.आई.आर.) दर्ज कराई गई।
उक्त कार्रवाई में अनिल राय अनुविभागीय अधिकारी कृषि, बहादुर सिंह नायब तहसीलदार सागर, रविन्द्र कुशवाहा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सागर, शिवकांत राजपूत उर्वरक निरीक्षक सह कृषि विकास अधिकारी, हर्ष साहू राजस्व निरीक्षक, विकास चौकसे पटवारी, आनंद खत्री पटवारी, भूपेन्द्र सिंह राजपूत तकनीकी सहायक, पी.एन. चतुर्वेदी कृषि विस्तार अधिकारी, कुलदीप क्रिश्चियन कृषि विस्तार अधिकारी एवं पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
उप संचालक कृषि राजेश त्रिपाठी द्वारा जानकारी दी गई कि इस संबंध में विस्तृत जांच की जाएगी। इस हेतु विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इस प्रकार के उर्वरक भंडारण एवं विक्रय पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।











