
विश्वविद्यालय: सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्राओं ने दिया अनेकता में एकता का संदेश
छात्रावास व्यक्तित्व विकास के अद्भुत केंद्र होते हैं- कुलपति
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के बालिका छात्रावास का ‘हॉस्टल डे’ कार्यक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित किया गया. उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वाय एस ठाकुर ने की. मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. रश्मि सिंह उपस्थित थीं तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव डॉ. एस पी उपाध्याय, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. डी के नेमा, कुलानुशासक प्रो. चंदा बेन उपस्थित थे. इस अवसर पर मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रो. ऋतु यादव एवं सुरक्षा अधिकारी प्रो. राजेंद्र यादव उपस्थित थे. संचालन डॉ. सुनीत वालिया ने किया.
स्वागत वक्तव्य देते हुए मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रो. ऋतु यादव ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि कन्या छात्रावासों में देश भर के अलग अलग हिस्सों से छात्राएं आती हैं. अलग अलग भाषा और संस्कृतियाँ उनके भीतर अनेकता में एकता का भाव पैदा करते हैं. उन्होंने छात्रावास की सुविधाओं और निरंतर चलने वाली गतिविधियों की जानकारी दी.
डॉ. एस पी उपाध्याय ने कहा कि हॉस्टल में रहना हमें एक संस्कृति सिखाता है. साथ में रहने से एकता की भावना पैदा होती है. उन्होंने कहा कि छात्र छात्राएँ किसी भी शैक्षणिक संस्थान की धड़कन होते हैं. आपके बिना विवि उड़ान नहीं भर सकता. आप यहाँ अपना भविष्य संवारने आये हैं. विवि आपके पंखों को उड़ान देने के लिए आपके साथ है. उन्होंने कहा कि हॉस्टल की यादें अमिट होती हैं जो जीवन भर आपके साथ रहती हैं. प्रो. रश्मि सिंह ने हॉस्टल से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया और छात्राओं को शुभकामनायें दीं.
प्रो. ठाकुर ने कहा कि हॉस्टल के दिन बहुत रोमांचक होते हैं. यह एक ऐसी जगह होती है जहाँ कई समस्याएँ भी होती हैं लेकिन इसके बावजूद जो सहयोग और समन्वय का कौशल हॉस्टल में विकसित होता है उसके जैसा दूसरा कोई स्थान नहीं है. इस परिवेश में आपको समस्याओं से जूझना भी आता है. आनंद भी आता है. संघर्ष भी होता है लेकिन उनकी आजीवन सुखद स्मृति भी होती है. हॉस्टल में दूर-दूर से विद्यार्थी आते हैं. यह व्यक्तित्व का विकास का एक महत्त्वपूर्ण स्थल है. हम क्लास के सहपाठी भले भूल जाएँ लेकिन हॉस्टल मेट को कभी नहीं भूल पाते.
छात्राओं ने दी अद्भुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लोक से लेकर आधुनिक संस्कृति का परिचय दिया
कार्यक्रम में एकल गायन, सामूहिक नृत्य, मार्शल आर्ट नृत्य आदि के माध्यम से देश की संस्कृतियों का अद्भुत समन्वय और समागम देखने को मिला. रानी लक्ष्मीबाई, सरस्वती और निवेदिता छात्रावास की छात्राओं ने एकल नृत्य, समूह नृत्य, एकल गायन, एकल शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किये. छात्राओं ने भोजपुरी, केरल, पंजाबी सहित देश की विभिन्न प्रदेशों की संस्कृतियों की काल्त्मक प्रस्तुतियां दीं. बुन्देली लोकनृत्य, गोंडी लोक नृत्य के साथ साथ आधुनिक संस्कृति से भी गायन एवं नृत्य के माध्यम से परिचय दिया. विविधतापूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया.
इस अवसर पर निवेदिता, रानी लक्ष्मीबाई, सरस्वती कन्या छात्रावास की समस्त वार्डन एवं मेस वार्डन डॉ. श्वेता शर्मा, डॉ. सुप्रभा दास, डॉ. दीपिका, डॉ. शिवानी, डॉ. अर्चना, संचिता मीणा सहित विश्वविद्यालय की कई महिला शिक्षिका उपस्थित थे. छात्राओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त प्रस्तुतियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए .











