डॉ. गौर एक महान कवि भी थे, उनकी स्मृति में काव्यांजलि का आयोजन अद्भुत है- कुलाधिपति

डॉ. गौर एक महान कवि भी थे, उनकी स्मृति में काव्यांजलि का आयोजन अद्भुत है- कुलाधिपति
विश्वविद्यालय परिवार की काव्यात्मक प्रस्तुति काव्यांजलि का हुआ आयोजन
सागर । डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्थापक महान शिक्षाविद् एवं प्रख्यात विधिवेत्ता, संविधान सभा के सदस्य एवं दानवीर डॉ. सर हरीसिंह गौर के 156वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 19 नवंबर से 26 नवंबर तक ‘गौर उत्सव’ 2025 का आयोजन किया जा रहा है । गौर उत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में विश्वविद्यालय परिवार की काव्यात्मक प्रस्तुति काव्यांजलि का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी, कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री कन्हैयालाल बेरवाल ने की । काव्यांजलि कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हिमांशु कबीर, गौर उत्सव मुख्य समन्वयक प्रो. आशीष वर्मा, गौर उत्सव संयोजक प्रो. उमेश कुमार पाटिल, प्रो. चंदा बेन मंचासीन रहे ।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. नवीन कानगो द्वारा रचित गौर गीत के विमोचन से हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने काव्यांजलि के मंच पर से कहा कि यह सागर विश्वविद्यालय डॉ. गौर की कविता ही है जो आज हर जगह प्रसारित हो रही है. डॉ. गौर को याद करते हुए उन्होंने कहा – “ ये मेरे पुण्य कर्मों का कोई फल रहा होगा मुझे अयोध्या जन्मभूमि से सागर कर्मभूमि लाया या यूँ कहें कि मेरे पुण्य कर्मों के कारण मुझे डॉ. गौर का उनके शहर सागर में बुलावा आया”।
कुलाधिपति कन्हैयालाल बैरवाल ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उनकी उपस्थिति गौर उत्सव के अंतिम दिन अर्थात गौर जयंती पर होने वाली थी, पर जारी गौर उत्सव की सफलता को देखकर वे खुद को रोक नहीं पाए और गौर जयंती की पूर्व संध्या पर ही वे विश्वविद्यालय में उपस्थित होकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने गौर उत्सव के आयोजन पर कुलपति और विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।
कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने मंच से मानवीय रचनात्मकता का वर्तमान समय की कृत्रिम बुद्धिमत्ता से टकराव के बारे में बताया, उन्होंने कहा कि आज कोई भी चैट जीपीटी पर किसी भी विषय पर तुरंत कविता बना सकता है, इसीलिए कवियों की ये जिम्मेदारी है कि वे रचनात्मकता में गहराई की ओर काम करें। जारी गौर उत्सव के सफल आयोजन तथा विभिन्न सफल और आगामी कार्यक्रमों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि ये गौर उत्सव यूँ ही प्रतिदिन चलता रहे और कभी समाप्त ना हो ।
इसके पश्चात विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर ने अपनी कविता के माध्यम से भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया तथा श्रीराम के आदर्श व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए समाजिक मूल्यों पर विचार प्रस्तुत किए। उसके बाद कुलगुरु की धर्मपत्नी श्रीमती ठाकुर ने मंच पर आकर पंचतत्त्व का उल्लेख करती हुई गहन संवेदना से पूर्ण कविता का पाठ किया। तत्पश्चात कुलाधिपति श्री बैरवाल ने भी अपनी सुगठित पंक्तियों से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। प्रो. कालीनाथ झा ने रामायण की चुनिंदा पंक्तियों का उद्बोधन कर वातावरण को आध्यात्मिक सौंदर्य से भर दिया। कविता–पाठ की श्रृंखला में उपस्थित सभी कवियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने विविध विधाओं — कविता, नज़्म, ग़ज़ल और शेर — की प्रस्तुति दी। काव्यांजलि में श्रृंगार, करुण, वीर, हास्य, रौद्र, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांति — इन नवरसों की मनोहारी झलकियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
इसी क्रम में प्रस्तुत की गई “स्वतंत्र जय हिन्द” शीर्षक कविता ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए और सभागार से उत्साही सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम में आमंत्रित सभी कवियों ने अपनी कवितापाठ प्रस्तुत किया. जिसमें प्रो. विश्वविद्यालय परिवार की काव्यात्मक आमंत्रित कविगण में प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. अशोक मिजाज, प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, प्रो. नवीन कानगो, प्रो. अनिल जैन, प्रो. राजेन्द्र यादव, डॉ. एस. पी. उपाध्याय, श्री संतोष सोहगौरा, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. उदय श्रीवास्तव, जय हिन्द स्वतंत्र, डॉ. नीरज उपाध्याय, डॉ. रेखा गर्ग सोलंकी, डॉ. अनूपी समैया, डॉ. रामहेत गौतम, डॉ. आफरीन खान, डॉ. किरण आर्या, अभिषेक ऋषि, डॉ. अवधेश कुमार, सिद्धांत शर्मा, हरिशंकर काछी, दुर्गेश कुमार सजल, चित्रांश कन्हौआ, दिव्या राय, सुरेन्द्र तिवारी, अंकित भारद्वाज, रेटिना मिश्रा प्रज्ञा सिंह एवं तान्यादीप शर्मा आदि कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी । कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमांशु कबीर ने किया ।

विधायक लारिया ने डॉ.गौर प्रतिमा पर माल्यार्पण और समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित किये
सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक,शिक्षा शास्त्री, न्यायविद,समाज सुधारक, साहित्यकार तथा महादानी एवं देशभक्त डॉ.सर हरीसिंह गौर की 156वीं जयंती पर बुंदेलखंड ही नहीं वरन् राष्ट्र पुण्य स्मरण कर रहा है। पुण्य स्मरण का मनोभाव को लिए विधायक श्री लारिया वि.वि.स्थित गौर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर डॉ. गौर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। विधायक श्री लारिया ने महान व्यक्तित्व एवं शिक्षापुंज के प्रकाश डॉ.गौर के गहन वाक्यांश “राष्ट्र का धन न सोने-चांदी के खजाने में या न कारखानों में सुरक्षित रहता है,यह केवल नागरिकों के मन और ज्ञान में समाया रहता है।” की गहनता पर श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
तीन बत्ती स्थित डॉ. गौर प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाय. एस ठाकुर, कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय, मुख्य समन्वयक प्रो. आशीष वर्मा, प्रो. उमेश पाटिल, प्रो. चंदा बेन, प्रो राजेंद्र यादव सहित विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने गौर जयंती की पूर्व संध्या पर शहर के तीन बत्ती पहुंचकर डॉ. गौर प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया.

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