विश्वविद्यालय में “महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा” विषय पर सेमीनार, सोशल मीडिया जागरूकता पर जोर

विश्वविद्यालय में “महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा” विषय पर सेमीनार, सोशल मीडिया जागरूकता पर जोर
सागर । डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के व्यवसाय प्रबंधन विभाग में सागर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के बैनर तले “महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा” विषय पर एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और युवाओं पर बढ़ते डिजिटल खतरों, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न तथा गैर-जिम्मेदाराना सोशल मीडिया व्यवहार के दुष्प्रभावों पर जागरूकता बढ़ाना था । कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर, विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत वालिया तथा सभी आमंत्रित चिकित्सकों ने मां सरस्वती और डॉ. गौर के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर तथा सरस्वती वंदना के साथ सेमीनार का शुभारंभ किया । इसके पश्चात् आयोजक डॉ. प्रेरणा जैन ने कुलपति श्री ठाकुर सहित सभी अतिथि डॉक्टरों का पुष्पगुच्छ से सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
सेमीनार का संचालन समिति की सचिव डॉ. निधि जैन ने अपने प्रभावी उद्बोधन के साथ किया । उन्होंने डिजिटल हिंसा के वर्तमान परिदृश्य, इसके बढ़ते मामलों और समाज में इसके व्यापक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की । इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ. स्मिता दुबे ने Gen-Z और सोशल मीडिया के गहराते प्रभावों पर अत्यंत सारगर्भित चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार निरंतर फोटो अपलोड करने और निजी क्षण साझा करने की प्रवृत्ति युवाओं में, चिंता, तनाव और आत्म-सम्मान से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे रही है । डॉ. ज्योति चौहान ने डिजिटल वायलेंस के अलग-अलग रूप साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन हैरेसमेंट, फेक प्रोफाइल, फोटो मॉर्फिंग आदि पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि डिजिटल मंचों पर बढ़ती निर्भरता के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है । वहीं डॉ. रूबी रेजा ने युवाओं द्वारा सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे जानकारी साझा करने, प्राइवेसी की अनदेखी करने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति लापरवाही जैसे पहलुओं को रेखांकित किया । उन्होंने कहा कि यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार न केवल युवाओं को जोखिम में डालता है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों को बढ़ावा भी देता है । कार्यक्रम में डॉ. तरुणा शर्मा, डॉ. मोनिका जैन और डॉ. स्वाति पटेल ने भी डिजिटल हिंसा के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक प्रभावों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है । सेमिनार के समापन पर डॉक्टर्स द्वारा डिजिटल सुरक्षा और जागरूकता पर आधारित एक प्रभावी नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से डिजिटल जिम्मेदारी, साइबर सेफ्टी और महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया । इस आयोजन का सफल संयोजन डॉ. प्रेरणा जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बबिता यादव, डॉ. वकुला कुमारी, डॉ. लोकेश उके, डॉ. अंकुर रंधेलिया, डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, श्री शुभम दादरिया, आयुषी जैन सहित विभाग के सभी शिक्षकगण मौजूद रहे । कार्यक्रम में लगभग 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और डिजिटल युग में सावधानी, जिम्मेदारी और जागरूकता की अनिवार्यता को समझा । सेमीनार न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों और चिकित्सकों को भी डिजिटल हिंसा के बढ़ते खतरों एवं इसके रोकथाम के उपायों के प्रति सजग किया ।

Leave a Comment

Read More