नई शिक्षा नीति के तहत हुनरमंद बन रहे विद्यार्थी: सागर के शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में निखर रहा विद्यार्थियों का हुनर

शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय सागर

नई शिक्षा नीति के तहत हुनरमंद बन रहे विद्यार्थी: सागर के शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में निखर रहा विद्यार्थियों का हुनर

फैशन डिजाइनिंग, पेंटिंग और संगीत के विशेष प्रशिक्षण से बनाया जा रहा है विद्यार्थियों को हुनरमंद

​सागर। शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनकी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए एक अनूठी पहल चलाई जा रही है। महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद रोजगार एवं करियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत फैशन डिजाइनिंग, पेंटिंग और संगीत पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें छात्र-छात्राएं पूरे उत्साह के साथ अपने हुनर को तराश रहे हैं।

​ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के संरक्षण एवं करियर प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. प्रतिभा जैन के कुशल मार्गदर्शन में यह संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमवोसंचालित हो रहा है। मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप, विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक कौशल से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर रोजगार के नए अवसरों को प्राप्त कर सकें।

​ कल्पनाओं को मिल रहे हैं नए रंग और रूप

महाविद्यालय में चल रहे ​फैशन डिजाइनिंग के सत्रों में विद्यार्थी वस्त्रों की बारीकियों को समझ रहे हैं। उन्हें फैब्रिक चयन, रंग संयोजन (Color Theory), आधुनिक डिजाइन निर्माण और बाजार के वर्तमान ट्रेंड्स का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राएं अपनी कल्पनाशीलता का उपयोग कर ऐसे आकर्षक परिधान तैयार कर रहे हैं, जो उनकी रचनात्मकता का प्रमाण दे रहे हैं।

​ कैनवास और दीवारों पर उकेरे जा रहे सामाजिक संदेश

​चित्रकला के प्रशिक्षण में विद्यार्थियों ने केवल कागज तक सीमित न रहकर दीवारों और कैनवास को भी अपना माध्यम बनाया है। रंगों और ब्रश की विविध तकनीकों को सीखते हुए विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर जीवंत पेंटिंग बना रहे हैं। यह सत्र कला के माध्यम से समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
​ सुर, ताल और लय का अनूठा अभ्यास

​संगीत और कला प्रेमी छात्र छात्राओं के लिए आयोजित किए जा रहे सत्र में गायन की बारीकियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विद्यार्थियों को सुर, ताल और लय के मूलभूत सिद्धांतों के साथ-साथ समूह गायन का भी अभ्यास कराया जा रहा है। संगीत की यह विधा न केवल उनकी एकाग्रता को बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें भविष्य के बड़े सांस्कृतिक मंचों के लिए भी तैयार कर रही है।
डॉ संदीप सबलोक ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग की मंशा के अनुरूप महाविद्यालय में चल रही ​इन कार्यशालाओं के माध्यम से महाविद्यालय परिसर एक जीवंत शिक्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहाँ विद्यार्थी अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान कर उसे करियर के रूप में ढालने की दिशा में अग्रसर हैं।
प्राचार्य जी के निर्देशानुसार
भवदीय
डॉ संदीप सबलोक

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