सामाजिक समरसता हमारे धर्म, संस्कृति और भारतीय दर्शन का मूल है-पूर्व गृहमंत्री, विधायक  भूपेन्द्र सिंह

सामाजिक समरसता हमारे धर्म, संस्कृति और भारतीय दर्शन का मूल है-पूर्व गृहमंत्री, विधायक भूपेन्द्र सिंह

सेवन,बांदरी। श्रद्धेय गुरु नानक देव जी द्वारा आरंभ की गई लंगर और पंगत परंपरा सामाजिक समरसता का प्रमाण हैं। यही पद्धति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में है जहां किसी से जाति, धर्म,पंथ नहीं पूछा जाता। सामाजिक समरसता हमारे धर्म, संस्कृति और भारतीय दर्शन का मूल है। यह उद्गार पूर्व गृहमंत्री खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने यहां आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता की नींव सत्य और बलिदान पर टिकी होती है। श्रद्धेय गुरु गोविंद सिंह जी के 4 पुत्रों ने हमारे देश,धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। दो बड़े पुत्र मुगलों से लड़ते हुए चमकोर के युद्ध में शहीद हुए। उनके दो बेटों जोरावर सिंह और फतह सिंह की उम्र तब 9 और 7 साल थी जब मुगलों ने इस्लाम स्वीकार करने से इंकार करने पर जीवित दीवार में चुनवा दिया। पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि जब इन वीर बालकों से मुगल सेनापति वजीर खां ने इन बच्चों को मौत से डराया तो बच्चों ने कहा कि यह दीवार हमारी मृत्यु का नहीं तुम्हारे जुल्म के अंत का स्मारक बनेगी।

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि देश और संस्कृति के लिए ऐसी शहादत देने वाले बच्चों के बलिदान दिवस को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने वीर बाल दिवस के रूप में देश भर में मनाने की पहल की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से राष्ट्र में पुनर्जागरण के साथ हिंदुत्व, संस्कृति और राष्ट्र के संरक्षण संवर्धन का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मानता है कि कोई भी राष्ट्र तभी मजबूत हो सकता है जब उसे राष्ट्र के में सामाजिक समरसता हो। हमारे सिख समाज में आज भी लंगर चलता है वहां सामाजिक समरसता देखने मिलती है। भारतीय संस्कृति में कभी जाति प्रथा को महत्व नहीं दिया गया। जाति, धर्म ,पंथ को बढ़ावा भारत को गुलाम बनाने वाले विदेशी आक्रांताओं ने दिया। इनमें से कुछ तत्व आज भी वोटों के लिए इसी विभाजन कारी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम ने वनवासियों के, शबरी के जूठे बेर खाकर निषाद राज को गले लगा कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन के भोज आमंत्रण पर उसके 56 भोग छोड़ कर दासी पुत्र महात्मा विदुर के घर जाकर उनका भोजन स्वीकार किया। इससे पता चलता है कि हमारे समाज में सामाजिक समरसता आज से नहीं है प्राचीन काल से रही है। सामाजिक समरसता हमारे धर्म संस्कृति और भारतीय दर्शन का मूल रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी सामाजिक समरसता को लेकर चलता है। संघ राष्ट्र और समाज के लिए अपना सर्वस्व देता है, लेता कुछ नहीं।

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि सबसे प्रामाणिक रामायण महर्षि वाल्मीकि जी कृत रामायण है। संत कबीर दास जी ने कहा है ’जाति पाति पूछे नहीं कोई, हरि को भजै सो हरि को होई’। संत रविदास जी संत रविदास जी का संकल्प था कि’ ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिलै सभी को अन्न, छोटे बड़े सब सम बसें रैदास रहें प्रसन्न।’

उन्होंने कहा कि हमारा संघ परिवार कुटुंब प्रबोधन की अवधारणा देता है। हमारे संस्कारों की पहली पाठशाला हमारा परिवार है। संयुक्त परिवार की जो व्यवस्था है यह हमारे पारिवारिक मूल्यों का पतन रोकती है। सप्ताह में एक बार परिवार का एक साथ बैठना, एक साथ भोजन भजन करना। पृथ्वी को माता मानते हुए पर्यावरण की चुनौतियों से निपटना। स्वदेशी अर्थव्यवस्था और स्वयं का बोध यह सब पंच निष्ठाओं में सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि संघ सत्ता के लिए नहीं राष्ट्र गौरव के लिए हिंदुओं को संगठित करता है और हिंदुत्व को एक जीवन पद्धति मानता है।

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि आज आतंकवाद, लव-जेहाद, धर्मांतरण, युवाओं में नशे का चलन यह सब चुनौतियां आज देश के सामने हैं जिनका सामना हम सामाजिक समरसता के साथ एकजुट होकर ही कर सकेंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से कहा कि अपने परिवार के बच्चों, युवाओं को संघ की शाखा में पहुंचाए जहां संपूर्ण व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का दृष्टिकोण मिलता और राष्ट्र प्रेम से जीवन गढ़ा जाता है।

कार्यक्रम का आयोजन भारत भारती शोध संस्थान ग्राम भारती एवं विश्व हिंदू परिषद में मिलकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सागर गुरुद्वारा प्रबंध समिति के ज्ञानी रंजीत सिंह जी ने की तथा विशिष्ट अतिथि रानी अवंतीबाई विश्वविद्यालय की कुलसचिव डा शक्ति जैन थीं जिन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती व भारत माता के पूजन से हुआ। आईजी सिंह ने संघ गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संयोजक मधुसूदन खेमरिया ने अतिथि परिचय देते हुए बताया कि सेवन गांव से जुड़े दो वरिष्ठ संघ प्रचारकों श्री गजाधर यादव एवं स्व हरिश्चन्द्र जैन के परिवार जन हमारे बीच उपस्थित हैं। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने इन परिवारों के प्रतिनिधि अशोक यादव तथा रश्मि जैन थीं का शाल श्रीफल से सम्मान किया। संचालन श्रीमती एकता खेमरिया ने किया। कार्यक्रम में कार्यक्रम के सहसंयोजक इंजीनियर एस आर सिंह, बीना से जिला ग्रामीण प्रमुख महादेव कुशवाहा, सेवन ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि विनय श्रीवास्तव कु मित्रा जैन, वर्षा जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल पाराशर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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