
विवि: पुरातात्त्विक संरक्षण के द्वारा एरण पुरास्थल को भव्यता प्राप्त हुई – डॉ. शिवाकांत बाजपेयी
सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे के निर्देशन में आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण जबलपुर मण्डल के अधीक्षण पुरातत्त्वविद् डॉ. शिवाकांत बाजपेयी ने ‘एरण का पुरातत्त्व एवं संरक्षण’ विषय पर आमंत्रित व्याख्यान पी.पी.टी. के द्वारा प्रस्तुत किया। डॉ. शिवाकांत बाजपेयी वर्त्तमान में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण जबलपुर मण्डल की पुरातत्त्व विशेषज्ञों एवं तकनीशियनों की टीम के साथ एरण पुरास्थल का पुरातात्त्विक संरक्षण का कार्य संपन्न करा रहे हैं। इस संरक्षण-परियोजना के द्वारा बुंदेलखण्ड के प्राचीनतम पुरास्थल एरण की विशाल महावराह प्रतिमा, महा-विष्णु प्रतिमा, नृसिंह प्रतिमा, प्राचीनतम गोपराज-सती स्तम्भ, गरुड़ध्वज स्तम्भ, कृष्णलीला शिलाफलक एवं अलंकृत स्तम्भों को निर्धारित रासायनिक केमिकल्स ट्रीटमेंट से भव्यस्वरूप प्रदान किया गया है। इसके साथ ही एरण पुरास्थल पर स्थित महाविष्णु मंदिर, गरुड़ स्तम्भ, कृष्णलीला फलक, नृसिंह मंदिर, वराह मंदिर सहित पूरे मंदिर परिसर को भव्यता प्रदान की गई है।
डॉ. शिवाकांत ने अपने व्याख्यान में एरण पुरास्थल एवं सती स्तम्भ पुरास्थल के चारों ओर बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने एवं एरण पुरास्थल पर मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध किए जाने का भी उल्लेख किया। इस आयोजन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जबलपुर मण्डल के तकनीकि अधिकारी इंजीनियर श्री प्रशांत शिंदे ने भी सहभागिता की।
14-16 जनवरी को एरण महोत्सव आयोजित होने के पूर्व एरण को पुरातात्त्विक संरक्षण के द्वारा भव्य स्वरूप प्रदान कर दिया गया है। एरण महोत्सव में मध्यप्रदेश के संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, जबलपुर मण्डल एवं सागर जिला प्रशासन के द्वारा तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे, डॉ. सुरेन्द्र कुमार यादव, डॉ. धनंजय विक्रम सिंह, डॉ. प्रवीण कुमार के., डॉ. शिवकुमार पारोचे के अतिरिक्त विभाग के शोधार्थीगण, भूगोल विभाग के शोधार्थीगण एवं विभाग के समस्त कर्मचारीगण एवं विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेन्द्र कुमार यादव ने एवं कार्यक्रम के अंत में आभार विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे ने व्यक्त किया।











