
भारत की वैश्विक पहचान में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक : डॉ. मनोज श्रीवास्तव
सागर, 16 जनवरी 2026/मुख्य वक्ता के रूप में राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने “उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत : चुनौतियां एवं संभावनाऍं” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक पहचान में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक है। आज का युवा भारत संकल्प, नवाचार, लोकतांत्रिक मूल्यों और तकनीकी दक्षता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सहभागिता के बल पर युवा न केवल राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त छवि भी गढ़ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण को जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया।
सेमिनार का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के पूजन-अर्चन से हुआ। संगीत विभाग की छात्राओं ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उद्घाटन सत्र के अवसर पर सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. मनोज श्रीवास्तव, लाल बहादुर शास्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलसचिव डॉ. पवन शर्मा, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष श्रीमती मनीषा मिश्रा, सदस्य विनय मिश्रा, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी मंचासीन थे। सभी अतिथियों द्वारा सेमिनार की प्रोसीडिंग का विमोचन किया गया। आयोजन सचिव ले. डॉ. अंशु सोनी ने मंच संचालन करते हुए सेमिनार के विषय पर विस्तृत चर्चा की। सेमिनार की समन्वयक डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने इस सेमिनार के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर प्रकाश डाला। सेमिनार के विषय प्रवर्तक डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि यूनान, मिस्र आदि देशों ने भारत से ज्ञान प्राप्त किया। भारत को यों ही सोने की चिडिया नहीं कहा जाता रहा है इसका कारण केवल प्राकृतिक संपदा नहीं है बल्कि ज्ञान, शिक्षा, आध्यात्म, कौशल और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन की परंपरा रही है। गंगा-यमुना के तटों से लेकर तक्षशिला और नालंदा तक भारत विश्व को ज्ञान की दिशा देता रहा है। कर्म आधारित सामाजिक व्यवस्था ने कौशल विकास को बढावा दिया जिससे भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध भारत बना। मंचासीन नगर विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने इस राष्ट्रीय सेमिनार पर प्रसन्नता व्यक्त की एवं कहा कि यह गर्व की बात है कि यह कन्या महाविद्यालय छात्राहित में सदैव शैक्षणिक गतिविधियों में सतत् सक्रिय रहता है। आपने आज के विषय को समसामायिक निरूपित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में एक्सीलेंस गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का वैश्विक दृष्टिकोण समावेशी है, जो संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भारतीय परंपरा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक संकट—पर्यावरण, सामाजिक असमानता एवं संघर्ष—का समाधान सहयोग, सह-अस्तित्व और मानवता के मूल्यों से ही संभव है। उद्घाटन समारोह में डॉ. प्रहलाद सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रथम तकनीकी सत्र में अध्यक्षता डॉ. अनुपमा कौशिक प्राध्यापक राजनीति विज्ञान डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर ने की। शोध छात्रा सुप्रिया जैन, अनुज अहिरवार, डॉ. अपर्णा चाचोंदिया, श्रीमती दुर्गेश नंदिनी गायकवाड़ तथा गुंजन देवलिया ने अपने-अपने आलेख वाचन में विषय से संबंधित उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। द्वितीय तकनीकी सत्र में अध्यक्षता डॉ. सर्वेश्वर उपाध्याय ने की। डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, श्री देव मिश्रा, वर्तिका सिंह, डॉ. कुलदीप यादव प्राचार्य बण्डा कॉलेज, डॉ. नीतीश ओबेरायन, डॉ. अशोक पन्या ने अपने-अपने आलेख प्रस्तुत किये। इस राष्ट्रीय सेमिनार से विभाग की छात्राओं को एवं उपस्थित जनसमुदाय को लाभ प्राप्त हुआ। सेमिनार के प्रथम दिवस में देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की, इस अवसर पर कन्या महाविद्यालय का संपूर्ण परिवार उपस्थित था।











