दर्शनशास्त्र विभाग में स्वामी विवेकानन्द जयन्ती एवं मकर संक्रान्ति का संयुक्त आयोजन

दर्शनशास्त्र विभाग में स्वामी विवेकानन्द जयन्ती एवं मकर संक्रान्ति का संयुक्त आयोजन

डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में दो प्रमुख पर्व—स्वामी विवेकानन्द जयन्ती एवं मकर संक्रान्ति—का संयुक्त आयोजन 16 जनवरी, शुक्रवार को किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इतिहास विभाग के आचार्य प्रो. बी. के. श्रीवास्तव रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने की।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन तथा माँ सरस्वती, डॉ. हरिसिंह गौर एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो. बी. के. श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानन्द के अल्प जीवनकाल में उनके अभ्यास, अनुशासन और एकाग्रता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मैक्स म्यूलर से विवेकानन्द के मिलन का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार वे पूर्ण समर्पण के साथ अध्ययन करते थे। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के प्रतिभाशाली व्यक्तित्व, मानसिक सामर्थ्य तथा उनके प्रेरक संदेश—“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”—का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने विवेकानन्द के अनुसार मन को जीतने के महत्व और राजयोग के माध्यम से आत्मविकास की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला तथा निर्बीज समाधि के महत्व को रेखांकित किया। अंत में उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की भाँति समय के सदुपयोग का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता के उद्बोधन के पश्चात इतिहास विभाग के शोधार्थी विजय प्रकाश एवं अभय सिंह चौहान ने अपने विचार व्यक्त किए और स्वामी विवेकानन्द के व्यक्तित्व एवं चिंतन की गहराई पर चर्चा की। दर्शनशास्त्र विभाग के शोधार्थी डॉ. दिनेश ने विवेकानन्द द्वारा विचार, अभिव्यक्ति एवं अनुभूति के समन्वय के माध्यम से योग की स्थापना पर प्रकाश डाला।
दर्शनशास्त्र विभाग के व्याख्याता डॉ. नरेंद्र कुमार बौध ने स्वामी विवेकानन्द की सार्वभौमिक धर्म की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके अनुसार धर्म का सार्वभौमिक स्वरूप ही धार्मिक संघर्षों को रोक सकता है। उन्होंने कहा कि विवेकानन्द के लिए आध्यात्मिक जागृति ही सच्चा धर्म है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने पश्चिम के विज्ञान और पूर्व के अध्यात्म के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अरविन्दो ने विवेकानन्द के विचारों का व्यापक प्रसार किया। मकर संक्रान्ति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें सामान्य से अलग और सार्थक आहार अपनाने का संकेत देता है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के ‘माइंडफुलनेस’ के अभ्यास को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेंद्र कुमार बौध ने किया। इस अवसर पर दर्शनशास्त्र एवं इतिहास विभाग के शिक्षक, शोधार्थी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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