
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं? सरकार दे जवाब — उच्च न्यायालय जबलपुर
जबलपुर | दिनांक: 23 जनवरी 2026
शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर की पूर्व प्रभारी प्राचार्या डॉ. सरोज गुप्ता के विरुद्ध गठित जांच समिति द्वारा गंभीर अनियमितताएँ प्रमाणित किए जाने के बावजूद अब तक कोई विभागीय कार्रवाई न होने पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ, जबलपुर में आज याचिका क्रमांक WP 2244/2026 की प्राथमिक सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्री मनिंदर सिंह भट्टी की खंडपीठ के समक्ष संपन्न हुई। यह याचिका शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर में वरिष्ठता सूची में हेराफेरी, जनभागीदारी समिति की निधि के दुरुपयोग एवं प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी है।
याचिकाकर्ता नितिन कुमार शर्मा, जो शासकीय पं. दीनदयाल उपाध्याय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष हैं, ने राज्य सरकार द्वारा जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई न किए जाने को चुनौती देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह, अखिलेश प्रजापति, सतीश कोरी एवं रमेश प्रजापति ने पक्ष रखा।
अदालत को बताया गया कि डॉ. सरोज गुप्ता के विरुद्ध शिकायत पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित द्वि-सदस्यीय जांच समिति — जिसमें प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, मकरोनिया के प्राचार्य डॉ. ए.सी. जैन एवं प्रोफेसर डॉ. बिंदु श्रीवास्तव शामिल थे — ने दिनांक 19 जून 2025 को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया कि—
वरिष्ठता सूची में हेराफेरी कर स्वयं को प्राचार्य नियुक्त कराया गया।
प्राचार्य पद का दुरुपयोग करते हुए महाविद्यालय की जनभागीदारी निधि की लगभग 2 करोड़ रुपये की एफडी बिना अनुमति तुड़वाई गई।
एक निजी बैंक में चालू खाता खोलकर उक्त राशि जमा की गई, जिससे एफडी पर मिलने वाला लाखों रुपये का वार्षिक ब्याज समाप्त हो गया और समिति को आर्थिक क्षति पहुँची।
जनभागीदारी खाते से अनियमित खरीद और भुगतान किए गए।
जांच रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई हेतु उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय को भेजा गया, किंतु लगभग सात माह बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार अथवा संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे आहत होकर याचिकाकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश राज्य (उच्च शिक्षा विभाग), उच्च शिक्षा आयुक्त भोपाल, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा सागर संभाग, संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं डॉ. सरोज गुप्ता को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने इसे जनहित, प्रशासनिक पारदर्शिता एवं सार्वजनिक धन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की अनियमितताओं पर न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी एवं समयबद्ध होगी।











