
मध्य प्रदेश 2026 का बजट, वित्तीय घाटे को कम करने वाला एवं शिक्षा और रोजगार को मजबूत करने वाला हो बजट
डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा
आर्थिक विशेषज्ञ
एम.ए. अर्थशास्त्र, एम.ए. ग्रामीण विकास, एम.बी.ए. वित्त, पी.एच.डी. एवं डी.लिट् अर्थशास्त्र
अध्यक्ष-युवा आर्थिक परिषद एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भारतीय आर्थिक परिषद और मध्यप्रदेश प्रभारी मध्य प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, टूरिज्म, सड़क विकास, ग्रामीण विकास कृषि विकास की ओर विशेष फोकस किया गया है, प्रति व्यक्ति आय और राज्य सरकार की आय भी बढ़ रही है, पिछले वर्ष 17 प्रतिशत सरकार को टैक्स ज्यादा प्राप्त हुआ है लेकिन दूसरी ओर देखे तो प्रदेश में अभी भी टूरिज्म के लिए लोग जिस तेजी से आने चाहिए नहीं आ पा रहे हैं, मध्य प्रदेश के भी लोग टूरिज्म के लिए मध्य प्रदेश के बाहर या विदेश जा रहे हैं, शिक्षा का स्तर देखे तो अभी भी सुधार नहीं हो पाया है, मध्य प्रदेश के स्कूल, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिससे शिक्षा का स्तर कमजोर हो रहा है, विश्वविद्यालय में 80 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं, कई विभाग तो बिना प्राध्यापक के ही चल रहे हैं, यह स्थिति आ रही है कि दिन पर दिन विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या कम हो रही है, मध्य प्रदेश के छात्र शिक्षा के लिए या तो भोपाल, इंदौर या मध्य प्रदेश से बाहर जा रहे हैं, रोजगार की बात करें तो छेत्रीय स्तर पर रोजगार कमजोर हो रहा है, सरकार के जो शासकीय उद्योग है या फैक्ट्रियां हैं उनमें कई वर्षों से नियुक्तियां नहीं हुई है, सरकार प्राइवेट उद्योगों के भरोसे रोजगार को छोड़ दिया है। मध्य प्रदेश सरकार का दावा हैं कि अब तक 32 लाख करोड़ से अधिक के निवेश के प्रस्ताव आए हैं, जिसमें 23 लाख से अधिक नए रोजगार के सर्जन होने हैं, 8.57 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावित धरातल पर है, सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समेत में 26 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव एवं 17 लाख नए रोजगार की बात की है, इसी तरह साथ रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में, 2 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव एवं 2.7 लाख नए रोजगार की बात की है, अगर हम राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो मोहन यादव जी ने 14 इंटर रैक्टिव सेशन कर 2.6 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव एवं 2.2 लाख नए रोजगार की बात की है, पांच ग्लोबल यात्रा कर 89000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव की बात की है, निश्चित रूप से प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सराहनीय काम किया है लेकिन जिस तरीके से अन्य विभागों को कम करना चाहिए, वह काम नहीं हो पाया है, निवेश के प्रस्ताव धरातल स्तर पर नहीं देख पा रहे, जिस स्तर पर सरकार ने प्रयास किया था। प्रदेश में भ्रष्टाचार अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, किसानों की पैदावार बढ़ रही है, लेकिन बिजली के बढ़ते दाम, समय पर बिजली और समय पर खाद और बीज नहीं मिलना, किसानों के लिए बड़े चुनौती है, 2 वर्ष होने के बाद भी अभी तक सरकार ने निगम मंडलों में नियुक्ति नहीं की है, जिससे निगम मंडलों की हालत चिंताजनक है, और विकास की रफ्तार धीरे हो रही हैं। निश्चित रूप से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधा पिछले 2 वर्ष में मजबूत हुआ है, सरकार ने नए-नए मेडिकल कॉलेज खोले हैं परंतु मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की कमी एक बड़ी चुनौती है और मध्य प्रदेश के प्राइवेट हॉस्पिटल जिस तरीके से मरीजों का शोषण कर रहे हैं आए दिन हमारे सामने आता है, मध्य प्रदेश को शराब बिक्री से आए बड़ी है लेकिन अगर हम दूसरी ओर देखे तो मध्य प्रदेश के गांव-गांव में शराब बिक रही है जिससे युवा वर्ग नशे का आधी हो रहा है और हमारे आने वाली पीढ़ी कमजोर हो रही है, प्रदेश में बढ़ता स्टैंप ड्यूटी के कारण रियल स्टेट कमजोर हो रहा है, पर्यटन के क्षेत्र में संभावना बहुत है इससे मध्य प्रदेश के अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है लेकिन शासकीय नौकरशाही के द्वारा इस और विशेष ध्यान नहीं देने के कारण पर्यटक मध्यप्रदेश की और जिस गति से आने चाहिए उस गति से नहीं आ पा रहे हैं और इस क्षेत्र में रोजगार भी उतना नहीं मिल पा रहा है जितनी संभावना थी, मध्य प्रदेश के विकास का आधार कृषि है, कृषि आधारित उद्योग जिस स्तर पर लगने चाहिए थे उस स्तर पर नहीं लग पा रहे हैं, आज भी मध्य प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ रहा है और कृषि रोजगार का एक सबसे बड़ा साधन है लेकिन कृषक को समय पर उनके उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाना, वह शासकीय स्तर पर जो किसान क्रय विक्रय कर रहे हैं सरकार के द्वारा उन्हें समय पर राशि नहीं देने से भी एक बड़ी समस्या आ रही है। मध्य प्रदेश के नीति आयोग की जो भूमिका होनी चाहिए वह भूमिका दिखाई नहीं दे रही है, ग्राम स्तर पर ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत होने की आवश्यकता है लेकिन इस और तेजी से काम नहीं हो पा रहा है, सरकार के टैक्स में वृद्धि हो रही है लेकिन उसका सही उपयोग न होने के कारण पैसे की बर्बादी भी अधिक देखने को मिल रही है, मध्य प्रदेश में अभी भी टेंपल टूरिज्म, रिवर टूरिज्म, एजुकेशन टूरिज्म, हेल्थ टूरिज्म आदि में बहुत संभावना है, इस और विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश सरकार 2025-26 का बजट 4,21000 करोड़ का या परंतु सरकार पर कर्ज 4,64340 करोड़ हो गया है। जी.एस.डी.पी. का 4.7 प्रतिशत राजकोषीय घाटा है। कर्ज का कारण सिंचाई परियोजनाओं, पावर प्रोजेक्ट्स, सामुदायिक विकास और लाडली बहनों जैसी विभिन्न लोक लुभावन योजनाओं के लिए सरकार का खर्च बढ़ गया है, 18669 करोड़ खर्च 2025-26 में लाडली बहनों पर। मध्य प्रदेश पर देश के कुल राज्य सरकारों के कर्ज का 5 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है और वह कर्ज लेने के मामले में देश में 9 वें स्थान पर है। मार्च 2024 में 3.75 करोड़, फरवरी 2025 में 4.22 लाख करोड़ एवं नवंबर 2025 में 4.64 लाख करोड़ कर्ज सरकार पर है, जबकि 2023-24 से 2025-26 में सरकार को 17 प्रतिशत टैक्स में वृद्धि हुई है। प्रदेश सरकार को अपने बजट का 44 प्रतिशत वेतन पेंशन और कर्ज का ब्याज चुकाने में देना पड़ता है। मध्य प्रदेश की जी.एस.डी.पी. 2024-25 में 15.03 लाख करोड रुपए थी, 2025-26 में 16.94 लाख करोड़, 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रति व्यक्ति आय 2024-25 में 1.52 लाख, वर्तमान मूल्य पर जबकि 70434 स्थिर मूल्यों पर है। प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 44.36 प्रतिशत, द्वितीय क्षेत्र का 19.03 प्रतिशत एवं तृतीयक क्षेत्र का योगदान 36.61 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं उद्योग को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में लगभग 85 लाख से अधिक हितग्राहियों को कुल 8 हजार 690 करोड़ से अधिक का लाभ प्रदान किया गया है, प्रदेश के 82 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि योजना की 1671.00 करोड रुपए की राशि का भुगतान किया गया है। आयुष्मान निरामयम भारत योजनांतर्गत 3 लाख 1 हजार 496 परिवारों के सदस्यों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है। राज्य में मातृ शक्ति को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड रुपए से अधिक की सहायता उपलब्ध कराई गई है। मध्य प्रदेश सरकार को वित्त आयोग के सिफारिश एवं रिजर्व बैंक आफ इंडिया की बात को मनाना चाहिए, फिजूल खर्च को रोकते हुए रोजगार आधारित कार्यों को बढ़ाना चाहिए इस बजट में वित्तीय घाटे को काम करके सरकार आए अपनी कैसे बढ़ाएं इस बात की सरकार को चिंता करनी चाहिए, युवा ,शिक्षा और रोजगार पर आधारित हो मध्य प्रदेश का बजट, कृषि ,पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर रियल एस्टेट ,आईटी को विशेष स्थान मिले बजट में, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मजबूत करने वाला सरकार बजट प्रस्तुत करें, जिससे ग्रामीण से शहरी की ओर तेजी से हो रहा पलायन को रोका जा सके, मध्य प्रदेश 2026 का बजट सरकार की आय बढ़ाने वाला और रोजगार क्षेत्र को मजबूत करने वाला हो।
डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा
आर्थिक विशेषज्ञ
एम.ए. अर्थशास्त्र, एम.ए. ग्रामीण विकास, एम.बी.ए. वित्त, पी.एच.डी. एवं डी.लिट् अर्थशास्त्र , सचिव मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ इकोनामिक एसोसिएशन,
अध्यक्ष-युवा आर्थिक परिषद एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भारतीय आर्थिक परिषद और मध्यप्रदेश प्रभारी











