
रामराज्य का आधार सत्य, न्याय और करुणा- अविराज सिंह
सागर। ग्राम भापेल में आयोजित श्री राम नवमी महामहोत्सव एवं प्रभात फेरी सम्मेलन में शामिल हुए युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय और लोक-कल्याण के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसी पावन दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में माता कौशल्या के पुत्र के रूप में हुआ था। राम का चरित्र हमें यह सिखाता है कि नेतृत्व आदेश से नहीं, बल्कि आचरण से स्थापित होता है और सत्ता का उद्देश्य उपभोग नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व निभाना है।
अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, सेवा और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने बताया कि राम ने यह सिद्ध किया कि सत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अकेला होकर भी अधर्म की विशाल सेना को परास्त कर सकता है। राम अपनी प्रजा के दुख में दुखी और उनके सुख में प्रसन्न रहने वाले सच्चे लोकनायक थे। उनका जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व सेवा और समर्पण से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक चरित्र संकट के समय ही निर्मित होता है। भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व भी राजमहलों में नहीं, बल्कि 14 वर्ष के कठिन वनवास के दौरान निखरकर सामने आया।
उन्होंने कहा कि आपकी क्षमता आपको शिखर तक पहुंचा सकती है, लेकिन आपका चरित्र ही आपको वहां बनाए रखता है। मनुष्य योजनाएं बनाता है, किंतु नियति अपना मार्ग स्वयं चुनती है। श्रीराम का वनवास उसी नियति का वह चरण था, जिसने उन्हें ‘ईश्वर’ के रूप में स्थापित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शिव धनुष भंग कर भगवान राम ने यह सिद्ध किया कि योग्यता तभी प्रकट होती है, जब व्यक्ति चुनौतियों को स्वीकार करता है।
अविराज सिंह ने कहा कि राम होना सरल नहीं है, क्योंकि इसका अर्थ है अपनी इच्छाओं का त्याग कर समाज के सुख को सर्वोपरि रखना। राम समुद्र की तरह गंभीर और हिमालय की तरह धैर्यवान हैं।
उन्होंने कहा कि “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा”, अर्थात कलियुग में राम नाम ही मुक्ति का आधार है। रामराज्य ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और करुणा के स्तंभों पर खड़ा होता है। भगवान शिव स्वयं श्रीराम को अपना इष्ट मानते हैं और उनके नाम का जप करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा राम में बसती है, और जब तक राम की कथा जीवित है, भारतीय संस्कृति अमर रहेगी। रामनवमी का वास्तविक संदेश अपने भीतर के अंधकार को समाप्त कर मर्यादा, विवेक और धर्म के प्रकाश को स्थापित करना है।
अविराज सिंह ने श्रीराम चल समारोह (शनिचरी) जीवन रैन बसेरा, बस स्टैंड, सागर श्री उत्सव समिति, द्वारा आयोजित श्री राम नवमी महोत्सव में तथा श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, चम्पाबाग, लक्ष्मीपुरा, में सहभागिता कीं।











