
सागर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी की प्रतिमा का अनावरण विधानसभा अध्यक्ष माननीय नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे- भूपेन्द्र सिंह
सागर। बिहार की राजनीति में जननायक कर्पूरी ठाकुर का नाम सामाजिक न्याय, सादगी और जनसेवा के पर्याय के रूप में आज भी अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्म लेकर उन्होंने जिस संघर्ष, प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई, वह भारतीय लोकतंत्र की सशक्त परंपरा का जीवंत उदाहरण है। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले कर्पूरी ठाकुर ने प्रारंभ से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका जीवन व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहेगा।
देश में उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसी क्रम में उनके जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में उनके विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विविध कार्यक्रमों और आयोजनों की श्रृंखला चल रही है। हम सब के लिए यह प्रसन्नता और गौरव का विषय है कि आज उनके सम्मान में आयोजित इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनकी प्रतिमा का अनावरण मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर एवं अन्य अतिथियों द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्हें नमन करते हुए हम सभी उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प करें। साथ ही, इस पुनीत कार्य को साकार करने के प्रयासों के लिए समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर के प्रति मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इसी कड़ी में एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे भी यह संतोष और आत्मीय प्रसन्नता है कि उनके सम्मान और स्मृति को स्थायी स्वरूप देने के इस प्रयास में सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ। स्थान चयन से लेकर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने तथा जिस आधार स्तंभ पर उनकी प्रतिमा स्थापित होनी है, उसके निर्माण में सहयोग कर पाना मेरे लिए केवल दायित्व नहीं, बल्कि सौभाग्य का विषय है।
कर्पूरी ठाकुर का जीवन जितना संघर्षपूर्ण था, उतना ही प्रेरणादायक भी। 24 जनवरी 1924 को बिहार के एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्मे कर्पूरी ठाकुर ने बाल्यकाल से ही कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने व्यक्तित्व को गढ़ा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और छात्र जीवन में ही उनमें नेतृत्व क्षमता के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे थे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी और देश की आजादी के लिए संघर्ष का मार्ग चुना। इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उनके संकल्प में कभी कमी नहीं आई।
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया। 1952 में पहली बार विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दशकों तक वे जनता के प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहे और अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जनहित को सर्वोपरि रखा। 1967 में बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए, जिनका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाना था। आगे चलकर 1970 और 1977 में वे दो बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और अपने कार्यकाल में उन्होंने सामाजिक न्याय को व्यवहारिक रूप देने का कार्य किया।
उनके द्वारा लागू की गई नीतियों ने समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को एक नई दिशा दी। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनकी सोच स्पष्ट थी कि जब तक समाज के सबसे कमजोर वर्ग को अवसर नहीं मिलेगा, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है। यही कारण है कि उन्हें “जननायक” की उपाधि मिली और वे करोड़ों लोगों की प्रेरणा बन गए।
कर्पूरी ठाकुर का व्यक्तित्व उनकी नीतियों जितना ही प्रभावशाली था। वे सादगी के प्रतीक थे और सत्ता के उच्च पदों पर रहते हुए भी उन्होंने कभी अपने जीवन में आडंबर को स्थान नहीं दिया। उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग यह दर्शाते हैं कि वे अपने निजी जीवन में भी उतने ही ईमानदार और सरल थे, जितने सार्वजनिक जीवन में। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि जनसेवा में पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोपरि होनी चाहिए।
आज जब देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय और समावेशी विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, तब कर्पूरी ठाकुर के आदर्श और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। वर्तमान शासन की नीतियों में भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का जो प्रयास दिखाई देता है, वह कहीं न कहीं उन महान नेताओं की प्रेरणा का ही परिणाम है, जिन्होंने सामाजिक न्याय को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।
कर्पूरी ठाकुर का संपूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि राजनीति का वास्तविक उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए। उन्होंने अपने कार्यों और विचारों से यह सिद्ध किया कि सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ भी बड़ा परिवर्तन संभव है। आज भी वे करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित हैं और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।











