
आज का दौर केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि सही अभिव्यक्ति और निरंतर अभ्यास का है-
डिग्री के साथ व्यक्तित्व का विकास ही दिलाएगा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता’
- डॉ ज्योति मार्टिन
स्नातक के बाद चुनौतियों को अवसर में बदलें, विद्यार्थी की एकाग्रता ही जीत का मंत्र: डॉ. प्रतिभा जैन
अनुभव और अभिव्यक्ति ही प्रतियोगी युग में सफलता का आधार है, विद्यार्थी अपने लक्ष्य पर अडिग रहें: डॉ. संदीप सबलोक
गवर्नमेंट आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में ‘दीक्षा सार’ संपन्न, 350 छात्रों को मिला भविष्य का मार्गदर्शन
सागर/ शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा संपन्न होने के उपरांत राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं के भविष्य निर्माण हेतु ‘दीक्षा-सार’ कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शासकीय महाविद्यालय ढाना की प्राचार्य डॉ. ज्योति मार्टिन रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रतिभा जैन द्वारा की गई, जबकि विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. संदीप सबलोक ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उक्त कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित मानसिक स्वास्थ्य एवं गतिविधियां कार्यक्रम के अंतर्गत परीक्षाओं एवं भविष्य को लेकर विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को कम करने के उद्देश्य को लेकर किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति मार्टिन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कॉलेज के तीन वर्ष केवल डिग्री पाने का समय नहीं, बल्कि खुद को गढ़ने का अवसर होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यार्थियों ने इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और कॉलेज की गतिविधियों के माध्यम से जो व्यवहारिक अनुभव प्राप्त किया है, वही उनके भविष्य की आधारशिला बनेगा। डॉ. मार्टिन ने कहा, “साक्षात्कार में आप किस तरह अपनी बात रखते हैं और आपका व्यक्तित्व कैसा है—ये छोटी-छोटी चीजें आपकी सफलता तय करती हैं। अब समय कम है, इसलिए पूरी ऊर्जा के साथ लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाएं।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रतिभा जैन ने विद्यार्थियों को भावुक विदाई देते हुए भविष्य की राह चुनने के लिए ‘लक्ष्य की स्पष्टता’ पर विशेष बल दिया। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए एक ही उद्देश्य होना अनिवार्य है; यदि आप अपने चुने हुए मार्ग से भटक जाएंगे, तो सफलता दूर हो जाएगी। डॉ. जैन ने स्नातकोत्तर (PG) में प्रवेश लेने वाले छात्रों को नई शिक्षा नीति के तहत विषयों के सही चयन के लिए तकनीकी जानकारी साझा की और आश्वस्त किया कि महाविद्यालय उनके मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खुद को करें तैयार: डॉ. संदीप सबलोक
दीक्षा सार कार्यक्रम के शिल्पी और विशिष्ट वक्ता डॉ. संदीप सबलोक ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार करते हुए कहा कि स्नातक के बाद का यह पड़ाव एक नए और व्यापक क्षितिज की शुरुआत है। डॉ. सबलोक ने मुख्य वक्ता के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा, “आज का दौर केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि सही अभिव्यक्ति और निरंतर अभ्यास का है। आपकी मेहनत और आपका कठिन परिश्रम ही आपको एक कुशल अधिकारी और समाज का नेतृत्व करने वाला नागरिक बनाएगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे प्रतिस्पर्धा के इस युग में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने के लिए स्वयं को मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त करें।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का प्रभावी संचालन एवं आभार प्रदर्शन जयपाल सिंह राजपूत द्वारा किया गया। कार्यक्रम में लगभग 350 छात्र-छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही। आयोजन को सफल बनाने में शोधार्थी अंकेश कुलस्ते और अनुज अहिरवार का विशेष सहयोग रहा। अंत में, महाविद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों के सुखद और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।











