
सागर एमपी
लोकेशन सागर
रिपोर्टर जागेश्वर पांडे
हाई कोर्ट की गाइडलाइंस को ठेंगा दिखाती देवरी पुलिस: नशा करने वालों का निकाला सार्वजनिक जुलूस
देवरी कला। एक ओर जहां मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सार्वजनिक रूप से आरोपियों का जुलूस निकालने पर पुलिस को फटकार लगाई है, वहीं दूसरी ओर सागर जिले के देवरी थाना प्रभारी मिनेश भदौरिया हाई कोर्ट की गाइडलाइंस की खुलेआम अवहेलना करते नजर आए। दरअसल, ‘नशा मुक्ति अभियान’ के नाम पर पुलिस ने आठ युवकों को पकड़कर उनका जुलूस पूरे नगर में निकाला, जो न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना जा रहा है।
देवरी पुलिस ने ‘नशे से दूरी अभियान’ के तहत नगर के विभिन्न क्षेत्रों से आठ युवकों को पकड़कर उन पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की। पकड़े गए युवकों में—
- प्रदीप पिता गौरीशंकर दुबे, उम्र 42 वर्ष, निवासी बेलढाना
- प्रवीण पिता गौरीशंकर दुबे, उम्र 30 वर्ष, निवासी बेलढाना
- शुभम पिता तुलसीराम शर्मा, उम्र 30 वर्ष, निवासी जवाहर वार्ड
- आदर पिता मनोहर विल्थरे, उम्र 25 वर्ष, निवासी घुघरी
- देव पिता रविशंकर उपाध्याय, उम्र 22 वर्ष, निवासी कौशिकिया कॉलोनी
- विजय पिता हल्के प्रसाद खत्री, उम्र 50 वर्ष, निवासी बाजार वार्ड
- जितेन्द्र पिता बैजनाथ रैकवार, उम्र 26 वर्ष, निवासी जवाहर वार्ड
- अमन पिता राजू कौशिकिया, उम्र 23 वर्ष, निवासी लक्ष्मी वार्ड
इन सभी को थाना से लेकर न्यायालय तक सार्वजनिक रूप से जुलूस में घुमाया गया। इस दौरान पुलिस ने खुद नारे लगवाए— “पुलिस हमारी बाप है, नशा करना पाप है।”
थाना प्रभारी मिनेश भदौरिया ने बताया कि ये सभी युवक नगर में नशा कर उत्पात मचाते थे, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की है। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि युवकों के पास से कोई भी नशीली सामग्री जब्त नहीं की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब आरोपियों के पास कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, केवल संदेह के आधार पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, तो फिर हाई कोर्ट की गाइडलाइंस को ताक पर रखकर सार्वजनिक जुलूस क्यों निकाला गया?
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जबलपुर हाई कोर्ट इस कार्रवाई को संज्ञान में लेकर देवरी थाना प्रभारी पर कोई कानूनी कदम उठाएगा या नहीं।











