अग्रणी कॉलेज में हुआ पं दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा का अनावरण

अग्रणी कॉलेज में हुआ पं दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा का अनावरण:

देश के संचालन करने के आधारभूत सिद्धांत एकात्म मानववाद व अंत्योदय पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने दिए
: विधायक शैलेंद्र जैन

सागर। पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आज एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र जैन, विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा ‘बंटी’ उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे, ओएसडी रामकुमार गोस्वामी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने की।
मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र जैन व ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा का अनावरण कर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर जनभागीदारी प्रभारी डॉ. जयकुमार सोनी, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. इमराना सिद्दीकी, राजकुमार नामदेव एवं निकेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन में पं. उपाध्याय जी को कर्मठ, कुशल राजनेता और दृढ़ इच्छाशक्ति के धनी महान व्यक्तित्व बताया। उन्होंने जानकारी दी कि उपाध्याय जी केवल राजनीतिक चिंतक ही नहीं, बल्कि उपन्यासकार भी थे और उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य और जगद्गुरु शंकराचार्य जैसे महान व्यक्तित्वों पर उपन्यास लिखे।

“देश का संचालन वही कर सकता है जो संवेदनाओं से जुड़ा हो” – विधायक जैन

अपने संबोधन में उन्होंने पंडित जी के सिद्धांतों को वर्तमान संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। विधायक जैन ने स्पष्ट किया, “देश का संचालन वही व्यक्ति कर सकता है जो समाज की संवेदनाओं से जुड़ा हो।” उन्होंने अंत्योदय सिद्धांत की चर्चा करते हुए कहा कि जब तक समाज के सबसे पीछे और सबसे नीचे के व्यक्ति का कल्याण नहीं होगा, तब तक राष्ट्र का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पं. उपाध्याय जी की इसी भावना को अपने कार्यों में प्रत्यक्ष रूप दे रहे हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने पं. उपाध्याय जी की मूर्ति स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी जीवनी विद्यार्थियों को अवश्य पढ़नी चाहिए, जिसने सिखाया कि अभाव के बावजूद मेधावी शिक्षा और सामाजिक जीवन में सफलता कैसे प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि “समाज के अंतिम व्यक्ति, उस दरिद्र नारायण की सेवा ही नारायण की सेवा है,” के दर्शन पर आज सरकारें कार्य कर रही हैं।
जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा ‘बंटी’ ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए अपने भावुक विदाई भाषण में कहा कि शिक्षक परिवार का सदस्य होने के नाते यह दायित्व उनके लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि ‘आत्मा की पुकार’ था। उन्होंने कहा, “इस शिक्षा मंदिर की सेवा करना मेरे जीवन का सौभाग्य और गर्व रहा।” श्री शर्मा ने कहा कि उनका संकल्प था कि कॉलेज को केवल अध्ययन का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की भूमि बनाना है।

महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमर कुमार जैन ने किया।

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