नवरात्र में साधना, आत्मानुशासन और नारी सम्मान का संदेश; सागर के विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में हुए शामिल
सागर। युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि नवरात्र का पर्व आत्ममंथन, आत्मानुशासन और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। यह हमें अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने, बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देती है। युवाओं को नवरात्र के अवसर पर साधना, संयम और आत्मविकास को अपनाते हुए दृढ़ संकल्प, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
अविराज सिंह ने पुरव्याऊ टोरी स्थित श्री सार्वजनिक दुर्गा महोत्सव में मां दुर्गा की आरती में सहभागिता की तथा महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ पाठ किया। उन्होंने कहा कि दुर्गा उपासना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है, जो मनुष्य को अन्याय, अहंकार और नकारात्मकता के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
शिव और शक्ति का संबंध सृष्टि के मूल भाव का प्रतीक
अविराज सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिव और शक्ति का संबंध सृष्टि के मूल भाव को अभिव्यक्त करता है। शिव चेतना के प्रतीक हैं, जबकि शक्ति उसकी सक्रिय अभिव्यक्ति है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप जीवन में तप, त्याग, संयम, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को अपनाने का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि मां शैलपुत्री का स्वरूप प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण की प्रेरणा देता है, वहीं मां ब्रह्मचारिणी साधना, तपस्या और आत्मसंयम का प्रतीक हैं। महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ साधक के मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करता है। नवरात्र में शक्ति की आराधना व्यक्ति को अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त करने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और उच्च आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
शक्ति उपासना का संदेश है धर्म की विजय और राष्ट्रसेवा
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा प्रसंग शक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को साहस, सामर्थ्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना गया है। शक्ति उपासना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में न्याय, सद्भाव, सेवा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा भी देती है।
अविराज सिंह ने कहा कि युवाओं को धार्मिक परंपराओं के मूल संदेश को अपने आचरण में उतारना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेते हुए निर्भयता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए। नवरात्र का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब पूजा-पाठ के साथ व्यवहार में भी संवेदनशीलता, अनुशासन और परोपकार को स्थान दिया जाएगा।
नारी सम्मान और सुरक्षा का संकल्प भी जरूरी
अविराज सिंह ने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। परिवार के निर्माण से लेकर समाज और राष्ट्र के विकास तक महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। नवरात्र जैसे पर्व तभी सार्थक होंगे, जब देवी की पूजा के साथ प्रत्येक महिला को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देने का संकल्प भी निभाया जाए।
उन्होंने कहा कि कन्या पूजन के साथ कन्या सुरक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक समानता के लिए भी प्रतिबद्ध होना चाहिए। देवी के विभिन्न स्वरूप नारी की शक्ति, करुणा, त्याग और सृजनशीलता का स्मरण कराते हैं। किसी भी समाज की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और उन्हें मिलने वाले अवसरों से किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने तथा सकारात्मक परिवर्तन का सहभागी बनने का आह्वान किया।
सागर के विभिन्न धार्मिक आयोजनों में की सहभागिता
नवरात्र के अवसर पर अविराज सिंह सागर में आयोजित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इसी क्रम में उन्होंने सराफा तिगड्डा, बड़ा बाजार में विनोद प्रजापति द्वारा आयोजित विशाल चुनरी यात्रा तथा मकरोनिया स्थित वैदिक वाटिका में वैदिक वानखेड़े द्वारा आयोजित वैदिक संस्कृति रास गरबा महोत्सव 2026 में सहभागिता की।
इसके अलावा मोतीनगर चौराहे पर श्री दुर्गा अवतार महोत्सव समिति द्वारा आयोजित महाआरती तथा संत कवरराम वार्ड स्थित झूलेलाल गार्डन में सिंधी समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित सिंधी समाज गरबा महोत्सव में भी शामिल होकर धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की।







