
राहतगढ़ बना अध्यात्म और आस्था का केंद्र, सिद्धचक्र महामंडल विधान में पहुंचे मंत्री गोविंद सिंह राजपूत
धार्मिक आयोजनों से समाज में शांति, सद्भाव और संस्कारों का होता है विस्तार : गोविंद सिंह राजपूत
सागर, 31 मई 2026। राहतगढ़
नगर में 25 मई से 3 जून 2026 तक आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आयोजन समिति, जैन समाज और क्षेत्रवासियों को इस भव्य धार्मिक आयोजन की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राहतगढ़ क्षेत्र में इस प्रकार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का निरंतर होना पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य की बात है। ऐसे पुण्य आयोजनों से समाज में धर्म, सद्भाव, नैतिकता और शांति का वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने कहा कि जैन समाज द्वारा समय-समय पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों ने राहतगढ़ को एक विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान प्रदान की है और आज यह नगर अध्यात्म एवं आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
हमारे आचार्य धीरज जी जो कि हमारे क्षेत्र के उन्होंने अपने विचारों और ज्ञान से देश-विदेश में धर्म ध्वजा फहराई है।
जैन धर्म का संदेश विश्व कल्याण का मार्ग
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, सत्य, करुणा, अपरिग्रह और आत्मकल्याण का संदेश देता है। जैनाचार्यों और तीर्थंकरों की शिक्षाएं मानवता को शांति, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जैन धर्म के सिद्धांत और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व शांति महायज्ञ और सिद्धचक्र महामंडल विधान जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम भी हैं।
सिद्धचक्र महामंडल विधान का विशेष महत्व
गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जैन धर्म में सिद्धचक्र महामंडल विधान अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्यदायी अनुष्ठान माना जाता है। यह विधान आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा प्रदान करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सद्गुणों का विकास करते हुए धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और पारस्परिक सहयोग की भावना मजबूत होती है। साथ ही हजारों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय व्यापार, रोजगार और सेवा गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
राहतगढ़ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजन, विधान एवं धार्मिक प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं। पूरा नगर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर है। जैन समाज एवं आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने आयोजन समिति के पदाधिकारियों, समाजजनों एवं सहयोगियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र के नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।











