थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर किसानों ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

थावरी मूंग खरीदी केंद्र पर किसानों ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
कचरा-मिट्टी मिली मूंग की खरीदी का आरोप, व्यापारी-बिचौलियों की सक्रियता पर भी उठे सवाल; केंद्र प्रभारी की भूमिका जांच के घेरे में
केसली/देवरी। केसली ब्लॉक के थावरी सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मूंग खरीदी केंद्र को लेकर किसानों की शिकायतों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। किसानों ने खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता, गुणवत्ता जांच में मनमानी और व्यापारी-बिचौलियों की कथित सक्रियता के आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जांच कराने और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्र पर कचरा और मिट्टी मिली गुणवत्ताहीन मूंग की खरीदी किए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि अच्छी गुणवत्ता की उपज लेकर पहुंचने वाले किसानों को गुणवत्ता जांच के नाम पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि खरीदी गई मूंग की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूरी प्रक्रिया की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट की जाए।
अपर कलेक्टर और एसडीएम ने लिया संज्ञान
किसानों की शिकायतों के बाद सागर अपर कलेक्टर अविनाश रावत और केसली एसडीएम राजनंदनी शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया है।
अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने कहा कि थावरी सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मूंग खरीदी केंद्र के संबंध में मामला संज्ञान में आया है। केंद्र की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं केसली एसडीएम राजनंदनी शर्मा ने भी खरीदी केंद्र को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि मामले में देवरी एसडीएम से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
स्वीकृत केंद्र केसली में, संचालन देवरी ब्लॉक के वेयरहाउस में होने का आरोप
किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि थावरी मूंग खरीदी केंद्र केसली ब्लॉक के लिए स्वीकृत बताया जा रहा है, लेकिन इसका संचालन देवरी ब्लॉक क्षेत्र स्थित एक वेयरहाउस में किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि दूरी अधिक होने के कारण उन्हें अपनी उपज लेकर केंद्र तक पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी और खर्च उठाना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में अब यह भी जांच का विषय है कि खरीदी केंद्र का संचालन स्वीकृत स्थान और निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
व्यापारी और बिचौलियों की कथित सक्रियता पर सवाल
किसानों ने खरीदी केंद्र पर व्यापारी और बिचौलियों की कथित सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि समिति प्रबंधक की बजाय कुछ अन्य लोग खरीदी केंद्र की गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीदी केंद्र पर किसी अनधिकृत व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
केंद्र प्रभारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
किसानों ने खरीदी केंद्र प्रभारी की भूमिका और केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। किसानों की मांग है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाए कि केंद्र का अधिकृत प्रभारी कौन है और खरीदी, तौल, गुणवत्ता जांच तथा दस्तावेजी प्रक्रिया की जिम्मेदारी किन लोगों के पास है।
यदि जांच में प्रभारी की अनुपस्थिति, दस्तावेजों में गड़बड़ी, तौल में अनियमितता, गलत तरीके से खरीदी अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी सामने आए
मामले में कुछ किसानों और स्थानीय लोगों ने कुछ व्यक्तियों को स्थानीय राजनीतिक नेताओं का कथित संरक्षण प्राप्त होने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
ऐसे में प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इन बिंदुओं की जांच की मांग
किसानों ने प्रशासन से थावरी मूंग खरीदी केंद्र की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। इसमें मुख्य रूप से—
खरीदी गई मूंग की गुणवत्ता और ग्रेडिंग
किसानों का पंजीयन और सत्यापन
तौल प्रक्रिया
भुगतान की स्थिति
स्टॉक और बारदाने का रिकॉर्ड
खरीदी रजिस्टर और संबंधित दस्तावेज
सर्वेयर की रिपोर्ट
केंद्र पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका
केंद्र पर मौजूद अन्य व्यक्तियों की भूमिका
व्यापारी या बिचौलियों की संभावित सक्रियता
की जांच शामिल है।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
थावरी मूंग खरीदी केंद्र को लेकर सामने आए आरोपों के बाद अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। अपर कलेक्टर और एसडीएम द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय होगी और यदि शिकायतों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बिना जांच के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पूरे मामले में प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट ही वास्तविक स्थिति सामने लाएगी।

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