
लोक अदालतें प्रकरणों के निराकरण का सबसे सुलभ व सस्ता माध्यम
40 खण्डपीठों द्वारा 2537 प्रकरण निराकृत किए गए जिसमें राशि रूपये 7,37,22,142/- (सात करोड़ सैंतीस लाख बाईस हजार एक सौ ब्यालीस रूपये) का अवार्ड पारित किया गया प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सागर प्रदीप सोनी के मार्गदर्शन में दिनाँक 09/03/2024 को नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन जिला मुख्यालय सागर एवं समस्त तहसील न्यायालयों में किया गया। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष प्रदीप सोनी द्वारा मॉं सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ववलित कर किया गया। दिनांक 09.03.2024 को आयोजित नेशनल लोक अदालत हेतु संपूर्ण जिले मंे कुल 40 खण्डपीठों का गठन किया गया, जिसमें न्यायालय में लंबित प्रकरणों में से 732 प्रकरण एवं प्री-लिटिगेशन के 1805 प्रकरणों का निराकरण राजीनामा के आधार पर किया गया, जिसमें मोटर दुर्घटना के 34 प्रकरणों का निराकरण कर क्षतिपूर्ति राशि रूपये 87,72,000/- के अवार्ड पारित किए गए, चैक बाउंस के 146 प्रकरणों के निराकरण में कुल राशि रूपये 3,27,85,175/- का समझौता अवार्ड किया गया। आपराधिक प्रकृति के शमन योग्य 309 प्रकरण, विद्युत के 82 प्रकरण, पारिवारिक विवाद के 50 प्रकरण तथा दीवानी एवं अन्य प्रकृति के 37 प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभिन्न बैंकों के 213 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, विद्युत विभाग के 205 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, नगर निगम के 416 प्री-लिटिगेशन प्रकरण, ई ट्रेफिक चालान के 386 प्रीलिटिगेशन संबंधी प्रकरण एवं अन्य प्रकृति के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण भी इस अवसर पर हुआ जिसमें राशि रूपये 1,56,45,952/- का राजस्व प्राप्त हुआ। नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सागर प्रदीप सोनी, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय अतुल कुमार खण्डेलवाल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मनीष भट्ट, जिला स्थापना पर पदस्थ समस्त न्यायाधीशगण, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ, सागर
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जितेन्द्र सिंह राजपूत, जिला विधिक सहायता अधिकारी योगेश बंसल, अधिवक्तागण, बीमा कंपनियों के अधिकारीगण, बैंक, विद्युत, नगर निगम एवं अन्य विभागों के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
सफलता की कहानी:-
- माननीय परिवार न्यायालय, सागर में लंबित पारिवारिक प्रकरण में अनावेदक सहारा कंपनी का एजेंट था जिसने अपनी पत्नि को पारिवारिक विवाद के चलते शादी के एक वर्ष पश्चात् 2019 में घर से पृथक कर दिया था जिसमें पीठासीन अधिकारी अतुल कुमार खण्डेलवाल, प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, सागर एवं खण्डपीठ के सदस्य अधिवक्ता द्वारा उभयपक्षों के मध्य समझौता कार्यवाही की गई जिसके अंतर्गत उक्त लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण में राजीनामा कार्यवाही संभव हुई।
- न्यायालय प्रीति ठाकुर, (सीनियर), सप्तम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड/ न्यायिक मजिस्ट्रेट जिला न्यायालय, सागर में लंबित पारिवारिक प्रकरण में अनावेदक द्वारा पारिवारिक विवाद के चलते विवाह के छः माह उपरांत ही पत्नि को पृथक कर दिया था जिसमें पीठासीन अधिकारी एवं खण्डपीठ के सदस्य अधिवक्ता द्वारा उभयपक्षों के मध्य समझौता कार्यवाही कर प्रकरण उक्त लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया।
- न्यायालय रीना शर्मा, दशम व्यवहार न्यायाधीश, जिला न्यायालय, सागर में लंबित आर.सी.एस.ए. प्रकरण में आवेदक व अनावेदक के मध्य प्लाट के क्रय-विक्रय संबंधी विवाद चल रहा था जिसमें पीठासीन अधिकारी एवं खण्डपीठ के सदस्य अधिवक्ता द्वारा उभयपक्षों के मध्य समझौता कार्यवाही कर प्रकरण उक्त लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया।











