ग्वालियर। पारंपरिक ज्ञान जो हमें हमारे आसपास के समाज , परिवार और संस्कृति से जुड़कर प्राप्त होता है पारंपरिक ज्ञान कहलाता है और जब हम किसी भी विषय पर स्वम अर्जित अपने दिमाग से ऐसी कोई खोज करते है जो आगे चलकर एक ब्रांड का रूप ले लेती है वो आविष्कार हमारी बौद्धिक संपदा होती है जिसका रजिस्ट्रेशन , पेटेंट कराना सुनिश्चित किया गया है ताकि आपकी अनुमति के बगैर कोई उसका दुरुपयोग ना कर पाए..यह कहना था व्याख्याता एन. के. चौबे का जो कि अपने एक दिवसीय “बौद्धिक संपदा अधिकार “विषय पर व्याख्यान देने के लिए मंगलवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में पहुंचे थे।
इस अवसर पर पत्रकारिता के यूजी और पीजी के विद्यार्थी ना सिर्फ उनसे रूबरू हुए बल्कि उनसे आईपीआर यानी बौद्धिक संपदा अधिकार के बारे में प्रश्न भी किए और ध्यानपूर्वक जवाब भी जाने ।
दरअसल एक दिवसीय हुए इस व्याखान का उद्देश्य IP के बारे में सामान्य जागरूकता एवं समझ को बढ़ाना था। इस दौरान उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी बताया कि किस तरह से मनुष्य की कोई खोज या कोई उत्पाद कैसे बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना लेता है और उसकी कीमत वैश्विक बाजार में बढ़ती जाती है। ठीक इसी प्रकार अपने विचारों की कल्पनाओं से तैयार कोई भी लेख –आर्टिकल , कहानी भी इसका हिस्सा बनती है।
चौबे ने बताया कि आई.पी.आर. के मुख्य प्रकारों में आविष्कारों के लिये पेटेंट, ब्रांडिंग के लिये ट्रेडमार्क, कलात्मक और साहित्यिक कार्यों के लिये कॉपीराइट, गुप्त व्यावसायिक सूचनाओं के लिये व्यापारिक गोपनीयता तथा उत्पाद की प्रस्तुति के लिये औद्योगिक डिज़ाइन शामिल हैं जिनका लीगल रजिस्ट्रेशन कराना संभव और जरूरी है। उन्होंने आगे बताया कि किस तरह से हम अपनी सामाजिक परम्पराओं , रीति रिवाजों से सीखकर अपनी बुद्धिमता से अपने विचारों को एक नया रूप दे सकते जो हमें ख्याति प्रदान कराने के साथ ही धन उपार्जित करने में भी सहायक बन रही है। उन्होंने देश भर में मशहूर मुरैना की गजक , चंदेरी साड़ियां, कोका–कोला , कड़कनाथ और अमूल दूध के स्लोगन का उदाहरण देते हुए यह भी समझाने का प्रयास किया कि किस तरह से आज यह वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे है और इनके आविष्कारिकों से लेकर सरकार , कंपनी और उपभोक्ताओं तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा भी मिल रहा है।
इस दौरान पत्रकारिता विभाग से एचओडी प्रोफेसर एस.एन. महोपात्रा, डॉ. हेमकुमारी कुर्मी , सतेंद्र नगायच , पुष्पेंद्र सिंह तोमर , राघवेंद्र सिंह खास तौर पर मौजूद रहे ।











