
मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा पर सवाल: सरकारी कॉलेजों की उपेक्षा, निजी संस्थानों को मिली प्राथमिकता
मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और मान्यता प्रक्रिया पर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने हाल ही में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता की सूची जारी की, जिसमें केवल चार सरकारी कॉलेजों को मंजूरी मिली, जबकि सैकड़ों निजी कॉलेजों को बिना किसी गंभीर आपत्ति के हरी झंडी दिखाई गई।
इस फैसले पर छात्र संगठन और शिक्षा विशेषज्ञ कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि कई निजी कॉलेजों में फैकल्टी की कमी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्हें मान्यता मिल गई, जबकि सरकारी संस्थानों को दरकिनार किया गया। संगठन ने सरकार से मांग की है कि पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलेजों की मान्यता रद्द की जाए।
मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की सूची के अनुसार, कुल 294 कॉलेजों को मान्यता दी गई है, जिनमें 138 GNM और 156 B.Sc नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं, कुल 14,680 सीटें निर्धारित की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कॉलेजों की उपेक्षा और निजी संस्थानों को प्राथमिकता देने से नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं।
इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि नर्सिंग शिक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। छात्रों और संगठनों की बढ़ती चिंता के बीच, सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।











