नशे के खिलाफ सागर पुलिस की मुहिम को मिला जनभागीदारी का संबल

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एसपी अनुराग सुजानिया ने कहा—नशामुक्त समाज के लिए पुलिस के साथ परिवार, स्कूल-कॉलेज और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी
सागर, 1 अक्टूबर 2026।
नशे के खिलाफ सागर पुलिस और जिला प्रशासन ने जनभागीदारी को मजबूत करते हुए नशामुक्त समाज की दिशा में अभियान को गति देने पर जोर दिया है। रवींद्र भवन में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने नशे की रोकथाम, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा की।
कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, शिक्षक, अभिभावक, युवा, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर ही नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नशे की प्रवृत्ति से अपराधों को बढ़ावा मिलने के साथ सबसे अधिक असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। सागर पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की बिक्री, तस्करी और सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का फोकस केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के स्रोत, सप्लाई चेन और स्थानीय नेटवर्क को चिन्हित कर कार्रवाई करने के साथ युवाओं में जागरूकता बढ़ाने पर भी है।
राष्ट्रीय रोडमैप के चार स्तंभों पर कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया ने पीपीटी के माध्यम से वर्ष 2026 से 2029 तक के राष्ट्रीय रोडमैप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशे के खिलाफ अभियान चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
प्रवर्तन, खुफिया एवं ऑपरेशन आधारित कार्रवाई — तस्करी, बिक्री और सप्लाई नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई।
प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण — संदिग्ध रसायनों और सिंथेटिक ड्रग्स की अवैध गतिविधियों पर निगरानी।
डिमांड एवं हार्म रिडक्शन — जागरूकता, काउंसलिंग, उपचार और पुनर्वास के माध्यम से नशे की मांग कम करना।
क्षमता-विकास एवं समन्वय — पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा एवं सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय।
कॉलेज और हॉस्टलों में बनेंगी नशामुक्ति समितियां
कार्यशाला में कॉलेजों एवं हॉस्टलों में नशामुक्ति समितियों और नशामुक्ति मित्रों की व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इन समितियों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक करने, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधन, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई कि संस्थानों या उनके आसपास किसी भी संदिग्ध नशीली गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
कोटपा एक्ट की जानकारी भी दी
कार्यशाला में कोटपा एक्ट, 2003 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध तथा शिक्षण संस्थानों और उनके आसपास तंबाकू उत्पादों के उपयोग एवं बिक्री से संबंधित नियमों से प्राचार्यों और हॉस्टल वार्डनों को अवगत कराया गया।
नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार से जोड़ने पर जोर
कार्यशाला में पुलिस कार्रवाई के साथ नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और उन्हें काउंसलिंग, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। परिवार, स्वास्थ्य विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर प्रतिभा पाल, नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, अपर कलेक्टर अविनाश रावत सहित प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, प्राचार्य, हॉस्टल संचालक एवं वार्डन, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की बहन कल्पना एवं गायत्री परिवार के तनुज पांडे ने नशे से दूर रहने, सकारात्मक सोच और परिवार की भूमिका पर विचार रखे। राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय प्रयासों, प्रशिक्षण और विभागीय समन्वय की जानकारी दी।
कार्यशाला का संदेश रहा—
“SAY NO TO DRUGS — हमारा है यही संदेश, नशा-मुक्त हो मध्य प्रदेश”
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